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कश्मीरी पंडितों को मिली धमकियों पर प्रदेश कांग्रेस प्रमुख बोले, हालात बेहतर होने का सरकार का दावा खोखला

 

जम्मू, 7 सितंबर (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर कांग्रेस प्रमुख तारिक हमीद कर्रा ने कश्मीरी पंडितों को मिली आतंकी धमकियों, सिंधु जल संधि और मेडिकल इंटर्न्स के प्रदर्शन समेत कई मुद्दों पर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा। न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में उन्होंने कहा कि सरकार घाटी में हालात सामान्य होने का दावा करती है, लेकिन धमकियों से उसका दोहरा चरित्र सामने आ गया है। उन्होंने मौजूदा स्थिति में भारत-पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौते की समीक्षा की मांग भी की।

कांग्रेस जम्मू-कश्मीर प्रमुख तारिक हमीद कर्रा ने आतंकी धमकियों, राज्य का दर्जा, सिंधु जल संधि और दिल्ली के पतन का मुद्दा उठाया। कश्मीरी पंडितों को मिली हालिया धमकियों को लेकर उन्होंने कहा, "ये सवाल तो भारत सरकार और जम्मू-कश्मीर के भाजपा इकाई से पूछना चाहिए जो बार-बार कहते हैं कि यहां के हालात पहले से बेहतर हो गए हैं। वो बार-बार दावा करते हैं, कि अब यहां न को उग्रवाद रहे और न ही हड़ताल और पत्थरबाजी जैसी घटना हो रही है। वो अपने हिसाब से हालात अच्छे और खराब होने के दावे करते हैं।"

तारिक हमीद कर्रा ने कहा कि जहां तक कश्मीर घाटी में स्थानीय लोगों का कश्मीरी पंडितों के साथ भाईचारा खत्म नहीं हुआ है, न वो कभी खत्म हो सकता है। जहां तक, गैर स्थानीय हिंदुओं की बात है, चाहे वो मजदूरी की वजह से जाएं या पर्यटन के लिए, कश्मीरी नहीं चाहते कि वहां पर हालात खराब हों। वो बिल्कुल भी नहीं चाहते कि पर्यटन बंद हो जाए या गैर स्थानीय लोगों का आना बंद हो जाए। सारी अर्थव्यवस्था पर्यटन, संरचना निर्माण और खेतों की जुताई, जो बाहर से लोग आकर करते हैं, पर निर्भर है। ये बात समझ लेना चाहिए कि स्थानीय लोग किसी कीमत पर ये नहीं चाहते कि वहां की स्थिति खराब हो।

सिंधु जल समझौते को लेकर पाकिस्तान की धमकियों पर कांग्रेस नेता ने कहा कि जब इस समझौते पर हस्ताक्षर हुआ था, उस वक्त की स्थिति कुछ अलग थी। उस वक्त कवरेज एरिया कम था, जनसंख्या कम थी और पानी का बहाव ज्यादा था। आज इतने वर्षों बाद स्थिति पूरी तरह से बदल गई है। कवरेज एरिया ज्यादा है, जनसंख्या ज्यादा है और पानी का बहाव कम हो रहा है।

उन्होंने कहा कि हमारी सोच के मुताबिक सिंधु जल समझौते की अब समीक्षा की जानी चाहिए। यहां पानी के कम होने और बिजली उत्पादन कम होने का तुरंत और सबसे ज्यादा प्रभाव जम्मू-कश्मीर के लोगों पर पढ़ता है। मैं यही कहूंगा कि यहां के लोगों की कीमत पर इस समझौते को जारी रखना आज की परिस्थिति में हमारे हक में नहीं है। इसलिए इसकी समीक्षा की जानी चाहिए।

मेडिकल इंटर्न्स के विरोध प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस नेता ने कहा कि जिस दिन से उन्होंने धरना शुरू किया, उसी दिन मैंने मुख्यमंत्री को एक चिट्ठी भेजी और इनकी परिस्थिति के बारे में उन्हें बताया। इन्हें 12 हजार प्रति महीने मिलता है, जबकि जम्मू-कश्मीर से बाहर ये 30-40 हजार तक जाता है। हमारी चिट्ठी के बाद स्वास्थ्य मंत्री की एक सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली और उन्होंने कहा कि इनकी फाइल की समीक्षा की जा रही है। उन्होंने धरना प्रदर्शन कर रहे इंटर्न्स से थोड़ा सा वक्त भी मांगा और कहा कि हम इस समस्या का समाधान करना चाहते हैं। इससे एक उम्मीद बनी थी, लेकिन पिछले दो दिनों में चिकित्सा विज्ञान और स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष अधिकारियों की तरफ से जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है, उन्हें धमकी दी जा रही है, पता नहीं अचानक से ऐसा क्या हो गया।

--आईएएनएस

केके/वीसी