Kashmiri Pandit Employees Threat: प्रधानमंत्री पैकेज के कर्मचारियों को नई धमकी, ट्रांजिट कॉलोनियों को लेकर बढ़ी चिंता
जम्मू-कश्मीर में प्रधानमंत्री पैकेज के तहत काम कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता एक बार फिर बढ़ गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (ULC) के नाम से एक नया धमकी भरा संदेश सामने आया है। इसमें घाटी में काम कर रहे कर्मचारियों को अलग ट्रांजिट कॉलोनियों में रहने से बचने की चेतावनी दिए जाने का दावा किया गया है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब कश्मीरी पंडित कर्मचारी सुरक्षित सरकारी आवास की मांग को लेकर लगातार अपनी आवाज उठा रहे हैं। ऐसे में नई धमकी ने कर्मचारियों की सुरक्षा और आवास व्यवस्था को लेकर सवाल और गंभीर कर दिए हैं।
सुरक्षित आवास की मांग कर रहे कर्मचारी
प्रधानमंत्री पैकेज के तहत घाटी में नियुक्त कश्मीरी पंडित कर्मचारी लंबे समय से सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने की मांग करते रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें अपने काम के साथ ऐसा सुरक्षित वातावरण भी मिलना चाहिए, जहां वे बिना किसी भय के रह सकें।
सरकार की ओर से ऐसे कर्मचारियों के लिए ट्रांजिट आवास की व्यवस्था की गई है। हाल के दिनों में इन आवासों का जल्द आवंटन करने की मांग भी तेज हुई थी। इसी बीच ट्रांजिट कॉलोनियों को लेकर कथित धमकी सामने आने से सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा फिर शुरू हो गई है।
ULC के नाम से पहले भी सामने आ चुके हैं संदेश
रिपोर्टों के अनुसार, पिछले कुछ समय में ULC के नाम से कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को धमकी देने वाले कई पत्र और संदेश सामने आए हैं। इनमें नौकरी छोड़ने की कथित चेतावनी और कर्मचारियों की निजी जानकारी सार्वजनिक करने जैसे दावों का भी जिक्र किया गया है।
11 सितंबर की रिपोर्टों में दावा किया गया कि ताजा संदेश में उन कर्मचारियों को भी निशाना बनाने की धमकी दी गई है, जो ट्रांजिट कॉलोनियों में रहने की योजना बना रहे हैं। एक रिपोर्ट में इसे पिछले करीब 40 दिनों के दौरान सामने आई छठी कथित धमकी बताया गया है।
हालांकि, इन संदेशों की प्रामाणिकता और इनके पीछे मौजूद लोगों की पहचान की आधिकारिक पुष्टि जांच का विषय है। सुरक्षा एजेंसियां इन दावों की जांच कर रही हैं।
1990 के दशक की घटनाओं से जुड़ी संवेदनशीलता
कश्मीरी पंडित समुदाय के लिए घाटी में सुरक्षा से जुड़े मामले बेहद संवेदनशील रहे हैं। 1990 के दशक में आतंकवाद और हिंसा के दौर में बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडितों को घाटी से पलायन करना पड़ा था।
ऐसे में सरकारी कर्मचारियों को मिल रही कथित धमकियों से समुदाय के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। कर्मचारियों से जुड़ी निजी जानकारियों के कथित तौर पर सार्वजनिक किए जाने की बात ने भी सुरक्षा एजेंसियों के सामने डेटा सुरक्षा की चुनौती खड़ी की है।
कर्मचारियों की मांग- डर के बिना मिले काम का माहौल
कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें ऐसी जगह सुरक्षित आवास दिया जाए, जहां से वे बिना डर के अपने कार्यस्थल तक पहुंच सकें। उनका कहना है कि सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण उन्हें अपनी नौकरी या अधिकारों से पीछे नहीं हटना चाहिए।
नई धमकी के बाद अब प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के सामने कर्मचारियों के आवास, कार्यस्थल और आवागमन—तीनों स्तरों पर सुरक्षा मजबूत करने की चुनौती है। फिलहाल कथित धमकी की जांच और उसकी वास्तविकता का पता लगाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए प्राथमिकता बना हुआ है।