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कश्मीर बदल रहा हैं, कांग्रेस अब भी भटका रही है देश को: विनोद बंसल

 

नई दिल्ली, 10 सितंबर (आईएएनएस)। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने वंदे मातरम विवाद और कश्मीर में बदलते हालात को लेकर कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि कश्मीर बदल रहा है, वहां तिरंगा, वंदे मातरम और इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल को अपनाया जा रहा है, जबकि कांग्रेस और उसके कुछ सहयोगी आज भी वंदे मातरम का विरोध कर देश को भटकाने की कोशिश कर रहे हैं।

आईएएनएस से बात करते हुए विहिप प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा, "जिस तरह से कांग्रेस ने पूरे देश में 'वंदे मातरम' को लेकर प्रोपेगैंडा चलाया है और एक तरह की लहर पैदा की है, वे अपने लोगों को उकसा रहे हैं। कांग्रेस पूरी तरह से उलझन की स्थिति में है। एक तरफ, कर्नाटक और तेलंगाना के मुख्यमंत्री पूरा 'वंदे मातरम' गाते हैं। कांग्रेस मुख्यालय में भी पूरा वंदे मातरम बजाया जाता है, लेकिन दूसरी तरफ सोनिया गांधी सीधे तौर पर इसका विरोध करती हैं। अब कांग्रेस आलाकमान पूरे देश को देश विरोधी बनने के लिए उकसा रहा है।"

विनोद बंसल ने कहा, "कश्मीर घाटी, जो कभी अलगाववाद, आतंकवाद और देश-विरोधी नारों से गूंजती थी, जहां कश्मीर में हिंसा फैलाने के लिए एके-47, बारूद और बमों का इस्तेमाल किया जाता था, आज वहां 'वंदे मातरम' की गूंज सुनाई दे रही है। जहां पर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल भी हो रहा है।"

विनोद बंसल ने आगे कहा, "वह इस्लामिक कट्टरपंथी लोग जो कहते हैं कि इस्लाम में नाच, गाना, फोटो और फिल्मांकन करना यह सब हराम है। आज वही इस्लाम के मानने वाले राज्य के मुख्यमंत्री स्वयं पूरा वंदे मातरम गाते हैं और उनके साथ में सैकड़ों लोगों की, जम्मू कश्मीर के लोगों की जो भीड़ है वह भी वंदे मातरम को पूरे सुर में गाती है। यह सुखद अनुभव है। कश्मीर बदल रहा है और बदलाव की ओर लौट चुका है।"

कांग्रेस पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा, "इस बीच दुर्भाग्यपूर्ण खबर है कि कल गुजरात के विधानसभा के अंदर भी एक जिहादी मानसिकता का कांग्रेसी वंदे मातरम को बहिष्कार करता है। ऐसे विधायक को तुरंत सदन की कार्यवाही, सदन के सदस्यता से बाहर निकाला जाना चाहिए।"

गरबा के मुद्दे पर भी विहिप प्रवक्ता ने कहा, "गरबा पूरी तरह से एक धार्मिक आयोजन है। यह मां दुर्गा की पूजा और उनकी भक्ति है। वहां आरती होती है, तिलक लगाया जाता है और माताएं तेज गति से नृत्य करती हैं। यह हमारी प्राचीन परंपरा का हिस्सा है। जो लोग श्रद्धा और भक्ति के साथ आते हैं और माता का गुणगान करते हैं, उनका कोई विरोध नहीं है; वे वहां आरती में शामिल हो सकते हैं, आरती कर सकते हैं, माता के सामने सिर झुका सकते हैं और माता को अपना मान सकते हैं।"

उन्होंने कहा, "लेकिन जो लोग गलत सोच के साथ जाते हैं, जो माथे पर तिलक नहीं लगाएंगे, सिंदूर नहीं लगाएंगे और कहेंगे कि 'मैं आरती नहीं करूंगा, मैं गुणगान नहीं करूंगा, मैं भारत माता की जय नहीं बोलूंगा, मैं वंदे मातरम नहीं बोलूंगा', वे माता के सामने कैसे सिर झुकाएंगे। जैसे पिछले कई कुछ बरसों से देखने में आया है कि जिस तरह से वह जाते तो गरबा के कार्यक्रम में और वहां करके क्या आते हैं, किसी से छुपा हुआ नहीं है।"

-- आईएएनएस

पीआईएम/वीसी