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कर्नाटक वाल्मीकि निगम घोटाला मामले में सीबीआई ने पूर्व मंत्री सहित कई आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की

 

बेंगलुरु, 2 जून (आईएएनएस)। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने कर्नाटक के महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम लिमिटेड से जुड़े बहुचर्चित धन के दुरुपयोग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए तत्कालीन मंत्री सहित कई आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। यह मामला निगम के फंड के कथित गबन और बैंकिंग धोखाधड़ी से जुड़ा हुआ है।

सीबीआई ने यह मामला यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की एम.जी. रोड शाखा, बेंगलुरु द्वारा दर्ज शिकायत के आधार पर दर्ज किया था। शिकायत में बैंक के कुछ अधिकारियों और अन्य अज्ञात लोगों पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे। बाद में जांच के दौरान राज्य सरकार के एसटी कल्याण विभाग और कर्नाटक जर्मन तकनीकी प्रशिक्षण संस्थान से जुड़े मामलों की भी जानकारी सामने आई, जिसके बाद कर्नाटक उच्च न्यायालय के निर्देश पर जांच का दायरा बढ़ाया गया।

जांच में सामने आया कि यह पूरा मामला एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा था, जिसमें तत्कालीन एसटी कल्याण मंत्री बी. नागेंद्र, उनके करीबी सहयोगी नेक्कांती नागराज और निगम के प्रबंध निदेशक सहित कई लोग शामिल थे। आरोप है कि इन लोगों ने मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार कर कई नकली कंपनियों और बैंक खातों का इस्तेमाल किया और सरकारी धन का दुरुपयोग किया।

जांच के अनुसार, कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम के यूनियन बैंक खाते में लगभग 187 करोड़ रुपये जमा किए गए थे। इनमें से करीब 89.63 करोड़ रुपये फर्जी चेक और आरटीजीएस ट्रांजैक्शन के जरिए अलग-अलग खातों में भेज दिए गए। यह रकम लगभग 600 बैंक खातों के माध्यम से घुमाई गई और बाद में इसे नकदी, सोना-चांदी और महंगी गाड़ियों में बदल दिया गया।

सीबीआई का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क में कुछ बैंक अधिकारियों की भूमिका भी सामने आई है, जिन्होंने नियमों की अनदेखी कर इन लेनदेन को अनुमति दी। जांच में यह भी पाया गया कि इस पैसे का एक हिस्सा राजनीतिक और निजी लाभ के लिए इस्तेमाल किया गया।

इसके अलावा जांच में यह भी सामने आया कि एसटी कल्याण विभाग के तहत चल रही कुछ अन्य योजनाओं में भी अनियमितताएं हुईं। वर्ष 2023-24 में कंप्यूटर लैब और मशीनरी खरीद के लिए दिए गए टेंडरों में भी गड़बड़ी पाई गई, जिसमें बिना उचित प्रक्रिया के ठेके दिए गए और भारी वित्तीय अनियमितता हुई।

सीबीआई ने यह भी पाया कि इस पूरे मामले में रिश्वत और अवैध भुगतान के कई मामले सामने आए, जिनमें सरकारी अधिकारियों, बिचौलियों और निजी कंपनियों की भूमिका संदिग्ध रही। जांच में कई खातों के जरिए करोड़ों रुपये के लेनदेन का पता चला, जो सीधे तौर पर सरकारी धन के दुरुपयोग से जुड़े थे।

एजेंसी ने जांच पूरी कर तीन अलग-अलग चार्जशीट अदालत में दाखिल कर दी हैं। सीबीआई के अनुसार, इस मामले में पूर्व मंत्री बी. नागेंद्र समेत कुल लगभग 30 लोगों की भूमिका सामने आई है, जिनमें सरकारी अधिकारी, बैंक कर्मचारी और निजी व्यक्ति शामिल हैं। मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया अदालत में जारी रहेगी।

--आईएएनएस

एसएचके/डीएससी