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कारगिल युद्ध से 'ऑपरेशन सिंदूर' तक, भारत की आतंकवाद के खिलाफ रणनीति अधिक सक्रिय, सटीक और निर्णायक

 

नई दिल्ली, 25 जुलाई (आईएएनएस)। 27 साल बाद भी कारगिल विजय की गूंज पूरे देश में सुनाई देती है। यह विजय साहस, बलिदान और अटूट राष्ट्रभक्ति का अमर प्रतीक है। फिर से हासिल की गई प्रत्येक चोटी इस बात की याद दिलाती है कि भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। इसकी रक्षा हर परिस्थिति में की जाएगी।

कारगिल के वीर सैनिकों के अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान से प्रेरित होकर भारत आज अधिक सशक्त, अधिक सक्षम और अधिक आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ रहा है।

कारगिल के बाद से भारत ने, रक्षा क्षमताओं और सुरक्षा से जुड़ी बदलती चुनौतियों का सामना करने की तैयारी, दोनों को लगातार मजबूत किया है। यही सोच देश की सुरक्षा नीति और ऑपरेशनल तैयारी को आकार देती रही है। वर्तमान में सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयर स्ट्राइक और 'ऑपरेशन सिंदूर' भारत की शक्ति के वैसे सशक्त उदाहरण हैं, जहां सेना के साहस, शौर्य और पराक्रम पर पूरा हिंदुस्तान गर्व महसूस करता है।

उरी आतंकी हमले के बाद भारतीय सशस्त्र बलों ने 28–29 सितंबर 2016 की रात नियंत्रण रेखा के पार स्थित आतंकवादी लॉन्च पैडों पर सर्जिकल स्ट्राइक कर उन्हें नष्ट किया। इस कार्रवाई में आतंकवादियों और उन्हें समर्थन देने वाले ढांचे को भारी क्षति पहुंचाई गई। यह अभियान सीमा पार आतंकवाद के विरुद्ध भारत की सक्रिय और दृढ़ नीति का स्पष्ट संकेत था।

इसके कुछ सालों बाद 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में हुए आतंकी हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 40 जवान शहीद हो गए। इसके जवाब में भारत ने 26 फरवरी 2019 को खुफिया सूचनाओं के आधार पर बालाकोट हवाई कार्रवाई को अंजाम दिया, जिसमें जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी प्रशिक्षण शिविर को निशाना बनाया गया।

यह ठिकाना नागरिक आबादी से दूर स्थित था और इसका संचालन मौलाना यूसुफ अजहर, जो जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर का बहनोई है, की ओर से किया जाता था। इन दोनों निर्णायक कार्रवाइयों ने स्पष्ट संदेश दिया कि भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के विरुद्ध आतंकवाद और छद्म युद्ध को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं करेगा। इसके साथ ही, दुनिया को संदेश दे दिया गया कि आवश्यक होने पर आतंकवाद और छद्म युद्ध के विरुद्ध प्रभावी व निर्णायक कार्रवाई करने में भारत सक्षम है।

इसके बाद भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के जरिए दुश्मन मुल्क को ऐसी धूल चटाई कि सीमापार से कोई भी दुस्साहस नहीं कर सकता है। मई 2025 में संचालित 'ऑपरेशन सिंदूर' ने भारत की विकसित होती सैन्य नीति और आतंकवाद के विरुद्ध उसके निर्णायक दृष्टिकोण को एक बार फिर स्पष्ट किया। यह अभियान पहलगाम में आम नागरिकों पर हुए आतंकी हमले के जवाब में चलाया गया। भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान तथा पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर स्थित नौ आतंकी ठिकानों को सटीक हमलों में निशाना बनाया।

इस अभियान में सटीक खुफिया जानकारी, ड्रोन, लॉइटरिंग म्यूनिशन तथा बहु-स्तरीय वायु रक्षा प्रणाली का प्रभावी उपयोग किया गया। जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख आतंकी ठिकानों और कमांड सेंटरों को नष्ट कर दिया गया। इन हमलों में 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए।

मारे गए आतंकवादियों में आईसी-814 विमान अपहरण और पुलवामा आतंकी हमले से जुड़े यूसुफ अजहर, अब्दुल मलिक रऊफ और मुदस्सिर अहमद जैसे प्रमुख नाम भी शामिल थे। इसके बाद 7 और 8 मई 2025 को पाकिस्तान की ओर से ड्रोन और मिसाइलों के माध्यम से हमलों का प्रयास किया गया, जिन्हें भारत की एकीकृत वायु रक्षा प्रणाली ने सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर दिया। इस जवाबी कार्रवाई ने भारत की नेटवर्क-केंद्रित युद्ध क्षमता और एकीकृत ड्रोन-रोधी रक्षा तंत्र की प्रभावशीलता को प्रदर्शित किया।

कारगिल युद्ध से लेकर 'ऑपरेशन सिंदूर' तक, आतंकवाद के विरुद्ध भारत की रणनीति अधिक सक्रिय, सटीक और निर्णायक हुई है। आधुनिक सैन्य प्रौद्योगिकी, उच्च स्तरीय खुफिया समन्वय एवं त्वरित कार्रवाई की क्षमता ने भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाया है।

कारगिल की विरासत न सिर्फ भारत के सैन्य संकल्प को आकार देती है, बल्कि यह देश की सामूहिक यादों में भी बसी हुई है। हर साल, कारगिल विजय दिवस देश को 1999 के वीर सैनिकों के साहस और बलिदान का सम्मान करने के लिए एकजुट करता है। ये पहल उनकी विरासत का सम्मान करती हैं और साथ ही आने वाली पीढ़ियों को साहस, कर्तव्य और देशभक्ति के मूल्यों से प्रेरित करती हैं।

--आईएएनएस

डीसीएच/एबीएम