कांवड़ यात्रा में डीजे की आवाज धीमी रखें, भाईचारा बढ़ाएं: मौलाना मोहम्मद जमील हयात
रामपुर, 20 जुलाई (आईएएनएस)। कांवड़ यात्रा के दौरान सौहार्दपूर्ण माहौल बनाए रखने की अपील करते हुए रामपुर के मौलाना मोहम्मद जमील हयात ने कहा कि धार्मिक यात्राएं पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ निकलनी चाहिए, लेकिन इस दौरान यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि किसी भी व्यक्ति को अनावश्यक परेशानी न हो। उन्होंने विशेष रूप से डीजे की तेज आवाज को लेकर चिंता जताई और श्रद्धालुओं से ध्वनि का स्तर नियंत्रित रखने की अपील की।
मौलाना मोहम्मद जमील हयात ने कहा कि उन्होंने वर्ष 2025 की कांवड़ यात्रा के दौरान कई ऐसे उदाहरण देखे, जहां मुस्लिम समुदाय के लोगों ने कांवड़ियों के लिए जगह-जगह नाश्ते और पेयजल की व्यवस्था की। यह आपसी सम्मान और भाईचारे की मिसाल है, जिसे आगे भी बनाए रखने की आवश्यकता है। शांति समिति (पीस कमेटी) की बैठकों के दौरान भी उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में यह सुझाव रखा था कि कांवड़ यात्रा के दौरान बजने वाले डीजे की आवाज बहुत अधिक तेज नहीं होनी चाहिए।
मौलाना ने कहा कि तेज ध्वनि से केवल किसी एक समुदाय के लोग ही नहीं, बल्कि सभी प्रभावित होते हैं। आसपास रहने वाले बीमार, बुजुर्ग और कमजोर लोगों को तेज आवाज से काफी असुविधा होती है, चाहे वे किसी भी धर्म के हों। हिंदू समाज से अपील करते हुए, उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान डीजे की आवाज धीमी रखी जाए ताकि किसी भी व्यक्ति को परेशानी का सामना न करना पड़े। धार्मिक आस्था का सम्मान करते हुए, यह भी जरूरी है कि आम नागरिकों की सुविधा और स्वास्थ्य का भी ध्यान रखा जाए।
मौलाना मोहम्मद जमील हयात ने कहा कि मैं हिंदू भाइयों से अपील करना चाहता हूं कि यात्रा शांतिपूर्ण ढंग से निकालें और डीजे की आवाज इतनी रखें कि किसी बीमार, बुजुर्ग या आसपास रहने वाले व्यक्ति को तकलीफ न हो। किसी को नुकसान या असुविधा नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने यात्रियों और आम राहगीरों की सुविधा पर जोर देते हुए कहा कि यदि कांवड़ यात्रा के दौरान कहीं यातायात जाम की स्थिति बनती है तो उसे जल्द से जल्द सामान्य कराने का प्रयास किया जाना चाहिए। राहगीरों को भी अनावश्यक कठिनाई नहीं होनी चाहिए और सभी को सहयोग की भावना से काम करना चाहिए। यदि कहीं जाम लगता है तो स्थानीय लोग और प्रशासन मिलकर कांवड़ियों की सहायता करें, ताकि यात्रा भी सुचारु रूप से चलती रहे और आम लोगों को भी राहत मिले।
उन्होंने आगे कहा कि इस प्रकार के सहयोग में केवल एक समुदाय की नहीं, बल्कि सभी लोगों की भागीदारी होनी चाहिए। यदि हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय मिलकर एक-दूसरे की सहायता करेंगे तो समाज में भाईचारा और आपसी विश्वास और मजबूत होगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि धार्मिक आयोजनों के दौरान संयम, सहयोग और पारस्परिक सम्मान बनाए रखें ताकि आस्था के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द भी मजबूत हो सके।
--आईएएनएस
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