करुणा और संवेदनशीलता को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं : न्यायमूर्ति विक्रम नाथ
लखनऊ, 17 अक्टूबर (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ तथा इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण भंसाली की उपस्थिति में शनिवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ के पंचम दीक्षांत समारोह में सम्मिलित हुआ। इस अवसर पर प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को मेडल एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित भी किया गया।
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि डिग्री हासिल करना मंजिल नहीं, बल्कि नई यात्रा की शुरुआत है। यह उपलब्धि विद्यार्थियों के परिश्रम, समर्पण, अनुशासन और ज्ञान प्राप्ति के प्रति प्रतिबद्धता का परिणाम है। उनकी सफलता माता-पिता, शिक्षकों और शिक्षण संस्थान के लिए भी गर्व का विषय है।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कहा कि शिक्षा की वास्तविक परीक्षा विश्वविद्यालय परिसर से बाहर निकलने के बाद शुरू होती है, जब विद्यार्थियों को दुनिया की जटिलताओं और चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उनकी सफलता का वास्तविक आकलन इस बात से होगा कि वे दूसरों के जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव लाते हैं।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने विद्यार्थियों से जिम्मेदार नागरिक बनने और संवैधानिक मूल्यों का पालन करने का आह्वान किया। कहा कि करुणा और संवेदनशीलता को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं। विश्वविद्यालय से विदा लेते समय संस्थान के मूल्यों को हृदय में और आदर्शों को आचरण में धारण करें। अपने कार्यों के माध्यम से इन मूल्यों को समाज और देश तक पहुंचाएं। उन्होंने विद्यार्थियों के उज्ज्वल, उद्देश्यपूर्ण और सफल भविष्य की कामना की।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण भंसाली ने कहा कि देश में विधि शिक्षा के क्षेत्र में डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय का विशेष स्थान है। उत्तर प्रदेश के केंद्र में गुणवत्तापूर्ण विधि शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्थापित इस संस्थान ने न्यायपालिका, विधि शिक्षा और लोकसेवा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
उन्होंने विश्वास जताया कि यहां से उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थी राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों के उच्च मानकों और परंपराओं को आगे बढ़ाने के साथ देश में कानून के शासन को मजबूत करने में सार्थक योगदान देंगे।
मुख्य न्यायाधीश शनिवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के पंचम दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने विधि शिक्षा के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। यहां से शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के सामने संस्थान की उच्च परंपराओं को बनाए रखने और उन्हें आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी है।
कुलपति प्रो. अमर पाल सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय ने 20 वर्षों में उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों की न्यायिक सेवाओं को 250 से अधिक अधिकारी दिए हैं। यहां से शिक्षित विधि विशेषज्ञ विभिन्न क्षेत्रों में योगदान दे रहे हैं। विधि शिक्षा केवल भौतिक सफलता नहीं, समाज सेवा का माध्यम भी है। इसका उपयोग वंचित वर्गों के कल्याण में हो।
--आईएएनएस
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