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कांशीराम को मरणोपरांत भारत रत्न देने की मांग, राहुल गांधी ने पीएम मोदी को लिखा पत्र

 

नई दिल्ली, 15 मार्च (आईएएनएस)। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बसपा संस्थापक कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग की है। उन्होंने इस बाबत पीएम मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा है कि हमारा संविधान हर भारतीय के लिए बराबरी, इज्जत और हिस्सेदारी का वादा करता है। कांशीराम ने अपनी जिंदगी समाज के सबसे निचले तबके के लोगों के लिए इन वादों को मतलब देने में लगा दी। ऐसा करके उन्होंने भारतीय लोकतंत्र की नींव को मजबूत किया और हमारे पॉलिटिकल सिस्टम को ज्यादा रिप्रेजेंटेटिव और इंसाफ वाला बनाया।

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा, "मैं भारत सरकार से सामाजिक न्याय के महान योद्धा और बहुजन चेतना के मार्गदर्शक कांशीराम को भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग करता हूं। यह सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान कांशीराम के साथ उस पूरे आंदोलन को श्रद्धांजलि होगी, जिसने करोड़ों बहुजनों को हक, हिस्सेदारी और आत्मसम्मान की राह दिखाई। इस मांग को लेकर मैंने पीएम मोदी को पत्र लिखा है।"

एक्स पोस्ट में राहुल गांधी ने पीएम मोदी को लिखे पत्र की कॉपी शेयर की। पत्र में उन्होंने लिखा कि मुझे उम्मीद है कि यह लेटर आपको ठीक लगेगा। आज जब हम कांशीराम की जयंती मना रहे हैं और उनकी विरासत और योगदान पर सोच रहे हैं, तो मैं यह रिक्वेस्ट करता हूं कि उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न दिया जाए। कांशीराम ने भारतीय राजनीति का स्वरूप बदल दिया।

उन्होंने कहा कि कांशीराम ने अपने आंदोलनों के जरिए बहुजनों और गरीबों में राजनीतिक जागरूकता फैलाई। उन्होंने उन्हें याद दिलाया कि उनका वोट, आवाज और प्रतिनिधित्व जरूरी है। यह देश सभी का बराबर है। उनकी कोशिशों की वजह से कई लोग जिन्होंने कभी सार्वजनिक जीवन में आने के बारे में नहीं सोचा था, वे राजनीति को न्याय और समानता पाने के एक साधन के रूप में देखने लगे।

राहुल गांधी ने कहा, "कई वर्षों से दलित बुद्धिजीवी, नेता और एक्टिविस्ट कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग कर रहे हैं। उनकी मांग लगातार बनी हुई है और इसे गहराई से महसूस किया जा रहा है। हाल ही में मैं लखनऊ में एक प्रोग्राम में गया था, जहां मौजूद नेताओं और लोगों ने इस मांग को जोरदार तरीके से दोहराया, जो एक आम भावना को दिखाता है। उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न देने से हमारे देश के लिए उनके बहुत बड़े योगदान को पहचान मिलेगी। इससे उन लाखों लोगों की उम्मीदों का सम्मान होगा जो उन्हें ताकत और उम्मीद के प्रतीक के तौर पर देखते हैं। मुझे उम्मीद है कि सरकार इस रिक्वेस्ट पर गंभीरता से विचार करेगी।

--आईएएनएस

डीकेएम/वीसी