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कानपुर को मिलेगी नई रफ्तार : 7,145 करोड़ के ग्रीनफील्ड हाईवे को मंजूरी, उद्योग जगत ने फैसले को सराहा

 

कानपुर, 2 जुलाई (आईएएनएस)। कानपुर और बुंदेलखंड की कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय कैबिनेट ने राष्ट्रीय राजमार्ग-34 के कानपुर-कबरई खंड पर 117.7 किमी लंबे एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड हाईवे को मंजूरी दी है। 7,145 करोड़ रुपए की इस परियोजना से उद्योग, व्यापार, परिवहन और निवेश को नई गति मिलने की उम्मीद है। कानपुर के उद्योग जगत, ट्रांसपोर्ट संगठनों और व्यापारिक संगठनों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया है।

ट्रांसपोर्ट संगठन के अध्यक्ष रवि शंकर मिश्रा ने कहा कि हम लोगों का गिट्टी मौरंग का, खनन का जो भी व्यवसाय है, मुख्य रूप से बुंदेलखंड से होता है और बुंदेलखंड में भी हमीरपुर और महोबा, बांदा वगैरह से होता है। तो ये मुख्य मार्ग है जो कबरई सागर मार्ग है, जिसकी स्वीकृति प्रधानमंत्री मोदी ने दी है। हम लोग बहुत-बहुत धन्यवाद देते हैं उनको, लेकिन एक बात कहेंगे धन्यवाद के साथ कि बहुत देर कर दी। हम लोगों को बहुत नुकसान हुआ, बहुत समय जाया हुआ। ये सड़क जो है, देशभर के अधिकतम दुर्घटनाओं में जान जाने वाली सड़कों में से, टॉप में से एक सड़क में से है। तो जाने कितनी जानें चली गईं। इस सड़क के बन जाने से आप समझिए कि हमीरपुर से मौरंग आती है, बांदा से आती है, महोबा से पूरी गिट्टी आती है।

रविशंकर मिश्रा ने कहा कि निश्चित तौर पर हम उम्मीद करते हैं कि हमको इस सबसे राहत मिलेगी और हमारा खर्चा भी कम होगा। डीजल की बचत होगी, टायर की मेंटेनेंस की बचत होगी। पुनः एक बार प्रधानमंत्री को बहुत-बहुत धन्यवाद। हम चाहेंगे कि ये काम जल्दी शुरू हो जाए ताकि हम लोगों को राहत मिले।

इंडस्ट्री कोऑपरेटिव स्टेट के चेयरमैन विजय कपूर ने कहा कि हम प्रधानमंत्री की घोषणा का बहुत स्वागत करते हैं। प्रधानमंत्री देश के विकास में अहम योगदान अदा कर रहे हैं और उनके नेतृत्व में देश बहुत आगे बढ़ रहा है। कानपुर-कबरई ग्रीनफील्ड एरिया से हमारे कानपुर के लोगों को तो बहुत फायदा होगा ही, हम लोग मध्य प्रदेश तक बड़ी आसानी से कहीं भी जा सकेंगे। मुझे लगता है कि इसके किनारे पर जो इंडस्ट्रियल हब की स्थापना होगी, उससे इंडस्ट्री बढ़ेगी, लोगों को रोजगार मिलेगा और देश का विकास होगा।

विजय कपूर ने आगे कहा कि अगर हमें बुंदेलखंड में कोई इंडस्ट्री लगानी है, तो जब एक घंटे या डेढ़ घंटे में हम कानपुर से कबरई तक पहुंच जाएंगे तो हमें कहीं और उद्योग लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। हम इसी मार्ग पर उद्योग लगाएंगे और इस मार्ग का विकास होगा। मुझे लगता है कि उत्तर प्रदेश में उद्योगों का विस्तार होगा। पहले भी बुंदेलखंड में बड़ी इंडस्ट्री आई थी, लेकिन सही मार्ग और इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं होने के कारण वह बंद हो गई। प्रधानमंत्री का जो विजन है, उसका मैं स्वागत करता हूं और उद्यमियों की ओर से उन्हें साधुवाद देता हूं।

राष्ट्रीय व्यापार मंडल के ज्ञानेश मिश्रा ने कहा कि सबसे बड़ी बात यह है कि कानपुर और कबरई यह बुंदेलखंड को जोड़ने वाली सड़क है और बुंदेलखंड से खास करके गल्ला, दलहन और तिलहन का बहुत बड़ा व्यापार होता है। महोबा, कबरई, बरुआ सुमेरपुर और हमीरपुर से बहुत माल आता है। कानपुर की गल्ला मंडी और लखनऊ सहित पूर्वी उत्तर प्रदेश की मंडियों तक सामान इसी मार्ग से पहुंचता है। इस सड़क के बनने से समय कम लगेगा। अभी साढ़े तीन घंटे लगते हैं और कई बार सिंगल रोड होने के कारण जाम लग जाता है। कुछ दिन पहले सात घंटे का जाम लगा था। इस परियोजना से बहुत बड़ी राहत मिलेगी। दूरी कम होगी, समय बचेगा और व्यापार के दृष्टिकोण से कानपुर और बुंदेलखंड दोनों को आर्थिक लाभ होगा।

इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील वैश्य ने कहा कि कानपुर लगभग सारे राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ा हुआ है और फोर लेन सिस्टम भी अधिकांश दिशाओं में उपलब्ध है। चाहे आगरा, दिल्ली या प्रयागराज की तरफ देखें, लेकिन बुंदेलखंड और मध्य प्रदेश की तरफ जाने वाले क्षेत्र में यह सुविधा नहीं थी। इसी कारण यहां जाम लगता था और ट्रांसपोर्टेशन की बड़ी समस्या थी। यह हाईवे बनने से निश्चित रूप से आवागमन आसान होगा। हमारी कनेक्टिविटी मध्य प्रदेश के साथ-साथ महाराष्ट्र और पश्चिमी राज्यों तक बेहतर होगी। व्यापार में, खासकर औद्योगिक उत्पादों के परिवहन में यह सड़क बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

कानपुर में व्यापार बढ़ने की संभावना पर सुनील वैश्य ने कहा कि बिल्कुल बढ़ेगी। कंस्ट्रक्शन मटेरियल का बहुत बड़ा बेस इसी मार्ग से जुड़ा है। मौरंग और गिट्टी का अधिकांश परिवहन इसी रास्ते होता है और कानपुर से पूरे उत्तर प्रदेश में जाता है। इसके बन जाने से सागर मार्ग तक हमारी पहुंच आसान होगी। वहां इंडस्ट्रियल लैंड भी सस्ती है और उद्योगों के विस्तार की असीम संभावनाएं हैं।

--आईएएनएस

पीएसके/एबीएम