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Kanpur Crime Story: दिवाली की रात गायब हुई 6 साल की बच्ची, अंधविश्वास ने उजाड़ दिया पूरा परिवार
 

 

उत्तर प्रदेश के कानपुर की यह घटना आज भी एक परिवार के साथ-साथ पूरे मोहल्ले के लोगों को झकझोर देती है। दिवाली की रात घर से निकली करीब 6 साल की बच्ची अगले दिन सुबह खेत में मृत मिली। जांच में सामने आया कि बच्ची के साथ पहले दरिंदगी की गई और फिर उसकी हत्या कर दी गई।
निजी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में पुलिस जांच के दौरान जो बातें सामने आईं, उन्होंने पूरे इलाके को हैरान कर दिया था। आरोपियों ने कथित तौर पर अंधविश्वास के चलते बच्ची को निशाना बनाया था। मामले में अदालत ने चार आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।
दिवाली की रात घर से निकली थी बच्ची
रमाबाई की बेटी प्रिया दिवाली के दिन घर में थी। उसी दौरान परिवार का परिचित युवक अंकुर उनके घर पहुंचा और बच्ची के साथ खेलने लगा। कुछ समय बाद उसने प्रिया को पटाखे दिलाने के लिए बाजार ले जाने की बात कही, लेकिन उसकी मां ने बच्ची को बाहर ले जाने से मना कर दिया।
इसके बाद अंकुर बच्ची को अपने साथ ले गया। रमाबाई को लगा कि वह उसे पड़ोस में अपनी चाची सुनीता के घर ले गया होगा। शाम होने के बाद जब प्रिया वापस नहीं लौटी तो परिवार ने उसकी तलाश शुरू की।
परिजनों ने आसपास के घरों और इलाके में बच्ची को तलाशा, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने आखिरी बार बच्ची को किसके साथ देखा गया था, इसकी जानकारी जुटाई।


सुबह खेत में मिली बच्ची
रातभर तलाश के बाद अगले दिन सुबह करीब 5 बजे कुछ महिलाओं ने खेत के पास बच्ची को पड़ा देखा। सूचना मिलते ही परिवार और पुलिस मौके पर पहुंचे। बच्ची की हालत देखकर इलाके में मातम छा गया।
पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा और मामले की जांच शुरू कर दी। शुरुआती जांच में बच्ची के साथ यौन हिंसा किए जाने की आशंका सामने आई।
पूछताछ में सामने आई आरोपियों की कहानी
पुलिस जांच में अंकुर पर शक गहराया। उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, पूछताछ में उसने बताया कि वह बच्ची को खेत की तरफ ले गया था, जहां उसका एक साथी पहले से मौजूद था।
पुलिस के अनुसार, दोनों ने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और बाद में उसकी हत्या कर दी। इसके बाद बच्ची के शव के साथ भी गंभीर क्रूरता की गई।
जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को अंकुर के चाचा परम और चाची सुनीता की भूमिका के बारे में भी जानकारी मिली।
संतान की चाह में अंधविश्वास का सहारा
मामले में सामने आई पुलिस जांच के अनुसार, परम और सुनीता की शादी को कई साल हो चुके थे, लेकिन उनके कोई संतान नहीं थी। इसी दौरान कथित तौर पर एक तांत्रिक ने उन्हें अंधविश्वास से जुड़ी सलाह दी।
रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी दंपती को विश्वास दिलाया गया था कि दिवाली की रात किसी बच्ची के शरीर के एक हिस्से को खाने से संतान प्राप्त हो सकती है। इसी अंधविश्वास के चलते बच्ची को निशाना बनाने की साजिश रची गई।
पुलिस के मुताबिक, इसी कथित अंधविश्वास के आधार पर अंकुर से बच्ची की हत्या करवाई गई थी।


मां के लिए दिवाली बन गई दर्द की याद
प्रिया की मां रमाबाई के लिए यह घटना जिंदगीभर का दर्द बन गई। उनका कहना था कि जिस पड़ोसी परिवार पर उन्हें भरोसा था, उसी से उनकी बच्ची को खतरा पहुंचा।
बच्ची की मौत के बाद मोहल्ले के लोगों के बीच भी पहले जैसा भरोसा नहीं रहा। परिवार अपने बच्चों को पड़ोस में भेजने से डरने लगे। दिवाली का त्योहार भी रमाबाई के लिए खुशी के बजाय उस रात की याद लेकर आता है, जब उनकी बेटी उनसे हमेशा के लिए दूर हो गई।
चार आरोपियों को उम्रकैद की सजा
इस मामले में लंबी कानूनी प्रक्रिया और सबूतों के आधार पर दिसंबर 2023 में विशेष पॉक्सो अदालत ने अंकुर, उसके साथी धीरेन, परम और सुनीता को उम्रकैद की सजा सुनाई।
कानूनी कार्रवाई पूरी होने के बावजूद प्रिया की मां के लिए इस घटना का दर्द खत्म नहीं हुआ। उनकी सबसे बड़ी पीड़ा यही रही कि जिस बच्ची को उन्होंने भरोसे के माहौल में पाला, वही बच्ची अंधविश्वास और अपराध की शिकार बन गई।