कन्नौज: पीडीए सम्मेलन में खाली कुर्सियों पर घिरी सपा, भाजपा बोली- पीडीए का मतलब परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी
नई दिल्ली, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। कन्नौज में समाजवादी पार्टी के पीडीए सम्मेलन में खाली पड़ी कुर्सियों और 26 नवंबर को संविधान दिवस पर घोषणापत्र जारी करने की घोषणा को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने सपा पर तीखा हमला बोला। योगी सरकार के मंत्रियों दानिश आजाद अंसारी, दया शंकर सिंह और गिरीश चंद्र यादव के साथ ही भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर और नेता सुब्रत पाठक ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव और सांसद चंद्रशेखर आजाद पर निशाना साधा।
मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा, "समाजवादी पार्टी ने हमेशा पीडीए के साथ धोखा किया है और पिछड़े वर्ग, दलित और अल्पसंख्यक अब इस बात को समझ चुके हैं। जब सपा के पास राज्यसभा के लिए दो उम्मीदवारों को नामित करने का मौका था, तो पिछड़े वर्ग, दलित या अल्पसंख्यक समुदाय से किसी को चुनने के बजाय उसने एक धनी व्यक्ति और परिवार के एक सदस्य को चुना। कन्नौज को ही देख लीजिए, जिसे समाजवादी पार्टी अपना गढ़ कहती है।"
उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में पूरी तरह से आधारहीन हो चुकी है। यह बेतुके बयान देती है और जनता को गुमराह और भ्रमित करने की नीयत से काम करती है। अपना घोषणापत्र जारी करने से पहले समाजवादी पार्टी को अपना रिपोर्ट कार्ड पेश करना चाहिए। उसे बताना चाहिए कि उसने 2012 से 2017 तक अपने कार्यकाल के दौरान उत्तर प्रदेश के विकास के लिए क्या काम किया।
सांसद चंद्रशेखर आजाद द्वारा सीएम योगी को बिजनौर से चुनाव लड़ने की चुनौती देने पर मंत्री गिरीश चंद्र यादव ने कहा, "मुख्यमंत्री ने तो अखिलेश यादव को पहले ही आमंत्रित किया है। पूरा विपक्ष चाहे तो एकजुट होकर वहां से चुनाव लड़ ले, जनता अपना जवाब दे देगी। चंद्रशेखर किसी तरह लोकसभा चुनाव जीत गए हैं और वह बार-बार इसी तरह की हरकतें करते रहते हैं। अगर दोबारा चुनाव लड़ेंगे तो उन्हें पता चल जाएगा।"
समाजवादी पार्टी द्वारा 26 नवंबर को अपना घोषणापत्र जारी करने पर मंत्री दया शंकर सिंह ने कहा, "संविधान दिवस के दिन अगर वो घोषणापत्र जारी करने जा रहे हैं, तो पहले यह ऐलान करें कि वो कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं करेंगे, जिसने सबसे ज्यादा संविधान और लोकतंत्र को कमजोर किया है। समाजवादी पार्टी की स्थापना लोकतंत्र के समर्थन में हुई थी, जबकि कांग्रेस ने आपातकाल लगाकर लोकतंत्र की हत्या की थी।"
उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति का अपना नेता किसे मानना है, यह उसका अपना मौलिक अधिकार है। किसी को जबरदस्ती किसी को नेता मानने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। हालांकि देश विरोधी तत्वों, गद्दारों या आतंकवादियों का समर्थन नहीं करना चाहिए। कोई भी किसी को भी अपना नेता मान सकता है, यह उसका मौलिक अधिकार है।
पीडीए को लेकर मंत्री दया शंकर सिंह ने कहा कि पीडीए नाम की कोई चीज नहीं है। पीडीए का मतलब सिर्फ 'परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी' है। यह सिर्फ परिवार के बारे में है और इससे आगे कुछ नहीं। समाजवादी पार्टी में कोई भी कार्यकर्ता मुख्यमंत्री बनने का सपना भी नहीं देख सकता।
सपा प्रमुख के कन्नौज में प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर ने कहा कि अखिलेश यादव संविधान की बात कर रहे हैं, जो अपने आप में एक मजाक है। सपा ने बाबासाहेब अंबेडकर को भू-माफिया कहा था।
भाजपा नेता सुब्रत पाठक ने कहा, "उनके लिए पीडीए का मतलब क्या है? जब समाजवादी पार्टी ने पीडीए शब्द पेश किया था, तो ऐसा इसलिए था क्योंकि उत्तर प्रदेश में अपने शासनकाल के दौरान अपने कृत्यों के कारण पार्टी 'मुन्नी' से भी ज्यादा बदनाम हो चुकी थी। इसलिए, खुद को एक नई पहचान देने के लिए यह पीडीए नाम लेकर आई।"
उन्होंने कहा कि उन्होंने बार-बार पीडीए की परिभाषा बदली है। कभी 'पी' का मतलब पंडित होता है, कभी पिछड़ा और कभी पीड़ित। इसी तरह, 'ए' का मतलब आधी आबादी या अल्पसंख्यक होता है। नतीजतन, लोग अभी भी यह नहीं समझ पाए हैं कि पीडीए का असल मतलब क्या है। दूसरा, जैसा कि हम लगातार आरोप लगाते रहे हैं, उनके लिए पीडीए का मतलब 'परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी' है यानी सिर्फ परिवार का विकास।
--आईएएनएस
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