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कालकाजी मंदिर में भोलेनाथ के जलाभिषेक की तैयारियां पूरी, सावन के पहले सोमवार पर विशेष आयोजन

 

नई दिल्ली, 2 अगस्त (आईएएनएस)। सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस बार सावन का पहला सोमवार 3 अगस्त को पड़ रहा है। इसे लेकर दिल्ली के प्रसिद्ध कालकाजी मंदिर में विशेष तैयारियां की गई हैं। मंदिर प्रशासन को उम्मीद है कि पहले सोमवार पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने पहुंचेंगे।

कालकाजी मंदिर के पीठाधीश्वर सुरेंद्रनाथ अवधूत ने आईएएनएस से बातचीत में बताया कि सावन के पहले सोमवार पर भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। उन्होंने कहा कि पूजा की शुरुआत सबसे पहले भगवान गणेश, माता अंबिका, भगवान कार्तिकेय और नंदी महाराज की पूजा से होगी। इसके बाद वैदिक मंत्रों के साथ भगवान शिव का ध्यान कर उनका जलाभिषेक और रुद्राभिषेक किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि सावन का महीना भगवान शिव को बेहद प्रिय माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण किया था। विष के प्रभाव से उनके शरीर का ताप बढ़ गया था। तब सभी देवी-देवताओं ने मिलकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया, जिससे उन्हें शीतलता मिली। तभी से सावन में शिवलिंग पर जल चढ़ाने और जलाभिषेक करने की परंपरा चली आ रही है।

सुरेंद्रनाथ अवधूत ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती ने भी सावन मास में कठोर तप और पूजा करके भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था। इसी वजह से सावन का महीना शिव-पार्वती की आराधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस दौरान सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना से व्रत रखती हैं, जबकि अविवाहित लड़कियां मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए भगवान शिव की पूजा करती हैं।

उन्होंने कहा कि सावन केवल शिव भक्ति का ही नहीं, बल्कि कई प्रमुख त्योहारों का भी महीना है। इसी माह में हरियाली तीज, मंगला गौरी व्रत और रक्षाबंधन जैसे पर्व मनाए जाते हैं। इसके अलावा देशभर से कांवड़िए पवित्र नदियों से गंगाजल लाकर अपने-अपने क्षेत्रों के शिव मंदिरों में भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। ऐसी मान्यता है कि श्रद्धा और सच्चे मन से जल चढ़ाने पर भगवान शिव भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

--आईएएनएस

पीआईएम/एएस