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'कहानी खत्‍म नहीं हुई, साथ मिलकर ह‍िसाब बराबर करेंगे', स्मृति सभा में नेतन्याहू ने पीड़ितों का बांटा दर्द

 

नई द‍िल्‍ली, 21 अप्रैल (आईएएनएस)। इजरायल में मंगलवार को युद्ध हमलों के पीड़ितों की राज्य स्मृति सभा आयोजि‍त की गई। इस सभा में राष्ट्रपति इसाक हरजोग, प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और ईरान युद्ध हमलों के पीड़ित परिवारों के लोग मौजूद रहे। उन्होंने हमलों को लेकर कड़ा रुख दोहराते हुए देश की सुरक्षा और जवाबी कार्रवाई के प्रति प्रतिबद्धता भी जताई।

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पीड़ितों की राज्य स्मृति सभा को संबोध‍ित करते हुए कहा क‍ि मेरे प्यारे भाइयों और बहनों, आपका गहरा नुकसान हम सबका नुकसान है। आपका गहरा दुख हम सबका दुख है। घायलों का शारीरिक और मानसिक दर्द हम सबका दर्द है।

उन्‍होंने कहा क‍ि हम एक ही परिवार जैसे हैं और एक साथ खड़े रहना ही हमारी ताकत है। हम साथ में शोक मनाते हैं, साथ में दुख साझा करते हैं, और साथ में ‘सभोपदेशक’ की किताब के शब्दों को याद करते हैं। अगर कोई गिर जाए तो दूसरा उसे उठा लेगा। हम साथ मिलकर अपने दुश्मनों से लड़ते रहेंगे और जो हमारी जान के दुश्मन हैं, उन्हें हराएंगे।

नेतन्याहू ने सात महीने पहले यरुशलम की उस घटना का ज‍िक्र क‍िया, ज‍िसमें एक बच्‍ची सरिता मेंडेलसन की मां की गोलीबारी में मौत हो गई थी।

उन्‍होंने कहा क‍ि हमारे और उनके बीच बहुत गहरी नैतिक खाई है। एक तरफ वो लोग हैं जो हमें खत्‍म करना चाहते हैं और दूसरी तरफ साफ द‍िल वाले हमारे अपने लोग हैं। जब से हमारा राष्ट्रीय पुनर्जागरण शुरू हुआ है ये घृणा से भरे लोग हमारे ख‍िलाफ खड़े हैं।

उन्‍होंने कहा क‍ि उनके धार्मिक नेता भड़काने वाली बातें करते हैं। उनके शैक्षणिक संस्थानों की किताबें, जो जहर से भरी होती हैं। वहां बच्चों का दिमाग बदला जाता है। इन सब चीजों से कई पीढ़ी से जूझते आ रहे हैं।

नेतन्याहू कहा, ''मैं आपको याद दिलाना चाहता हूं कि आज से 90 साल पहले, 1936 में दंगे शुरू हुए थे, जिन्होंने यहूदी समुदाय को बहुत नुकसान पहुंचाया था, लेकिन हम तब भी टिके रहे।

हमारे पड़ोसियों का यह क्रूर और कट्टर रूप अपने चरम पर सात अक्टूबर के हमले में सामने आया, जिसे सिम्हात तोरा के दिन पश्चिमी नेगेव में हुए नरसंहार के रूप में जाना जाता है, जो ढाई साल पहले हुआ था।

उन्‍होंने कहा क‍ि सितंबर 2025 में जब मैंने संयुक्त राष्ट्र में अपना आखिरी भाषण दिया था, मैंने निर्देश दिया था कि उन घटनाओं की गवाही संयुक्त राष्ट्र भवन में दिखाई जाए। उसी भाषण में मैंने दुनिया के लोगों से कहा था कि वे इंटरनेट पर एक कोड के जरिए उस जगह की सच्चाई देखें और समझें कि हमारी लड़ाई क्यों सही है।

लाखों लोगों ने इस तरह सीधे उन भयानक अपराधों को देखा जो हमास की ओर से किए गए थे। कुछ हफ्तों बाद गाजा में हमास पर हमारे सैन्य दबाव और हमारे दोस्त अमेरिका के सहयोग से हम सभी बंधकों को आखिरी व्यक्ति तक वापस लाने में सफल हुए, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। हम अभी भी लगातार कोशिश कर रहे हैं कि जिन्होंने हमें नुकसान पहुंचाया है, उनसे हिसाब बराबर किया जाए। आईडीएफ और आईएसए की विशेष टीमों की मदद से हम उनका पीछा करते हैं और हमें कई सफलताएं भी मिली हैं।

उन्‍होंने कहा क‍ि जब मैं ऑपरेशन 'रोरिंग लायन' की शुरुआत में बेत शेमेश गया था तो मैंने देखा कि ईरान के हमले में प्रभावित जगह के मलबे के बीच इजराइल के झंडे लगे हुए थे। यह एक प्रतीक है हिम्मत और मजबूती का और उन लोगों के सामने झुकने से इनकार का जो तबाही और बर्बादी लाते हैं।

--आईएएनएस

एवाई/डीकेपी