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कभी उड़ानें ठप, अब फ्रिज का तापमान 50 डिग्री तक पहुंचा रहे हैकर; साइबर हमलों का बदलता चेहरा

 

नई दिल्ली, 3 नवंबर (आईएएनएस)। साइबर हमले का दायरा अब कंप्यूटर, बैंक और सरकारी वेबसाइट्स तक सीमित नहीं रह गया है। कभी एयरपोर्ट पर यात्रियों की चेक-इन व्यवस्था ठप पड़ जाती है तो कभी किसी बड़ी कंपनी का उत्पादन रुक जाता है। सोमवार (2 नवंबर) को एक ऐसी खबर आई जिसने दुनिया को डराया भी और हैरान भी किया। इस एक दिन सात यूरोपीय देशों में सुपरमार्केट्स की रेफ्रिजरेशन व्यवस्था प्रभावित हुई।

कुछ में फ्रीजर का तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया और दुकानों को खराब होने की आशंका वाले खाद्य पदार्थ हटाने पड़े। बेल्जियम, एस्टोनिया, फिनलैंड, आयरलैंड, लक्जमबर्ग, नीदरलैंड और स्वीडन में ऐसी घटनाएं सामने आईं।

बेल्जियम में 'कैरेफोर' के करीब 15 स्टोर प्रभावित हुए, जबकि आयरलैंड में 'सुपरवैल्यू' के 13 स्टोर्स की रेफ्रिजरेशन व्यवस्था में समस्या आई। स्वीडन की 'आईसीए' और 'कूप' ने भी अपने कुछ स्टोरों में ऐसी परेशानी की पुष्टि की। हमलों की जिम्मेदारी किसी समूह ने नहीं ली है। जांच एजेंसियां यह भी स्पष्ट नहीं कर पाई हैं कि अक्टूबर और नवंबर की घटनाओं के पीछे एक ही समूह है या नहीं।

यह घटना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले 12 अक्टूबर को फ्रांस में सैकड़ों सुपरमार्केट और दुकानों की रेफ्रिजरेशन व्यवस्था पर इसी तरह के साइबर हमले की खबर आई थी।

बड़े स्टोर्स में सैकड़ों फ्रिज और फ्रीजर एक केंद्रीय डिजिटल सिस्टम से नियंत्रित होते हैं। कर्मचारी एक ही जगह से तापमान की निगरानी कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर दूर से सेटिंग बदल सकते हैं। यदि इस सिस्टम की सुरक्षा कमजोर हो तो हमलावर उसमें अनधिकृत प्रवेश कर तापमान बढ़ा सकते हैं या कूलिंग को प्रभावित कर सकते हैं। इस तरह किसी दुकान में रखे खाद्य पदार्थों को नुकसान पहुंचाने के लिए हमलावर को वहां मौजूद होने की जरूरत नहीं पड़ती।

यूरोप की इन घटनाओं को पिछले दो-तीन साल में अब तक सामने आए दूसरे साइबर हमलों के संदर्भ में देखें तो एक बड़ा बदलाव दिखाई देता है। अब हमले का असर केवल कंप्यूटर स्क्रीन पर नहीं, बल्कि वास्तविक दुनिया की सेवाओं और मशीनों पर भी पड़ रहा है।

साइबर हमले का एक बड़ा उदाहरण सितंबर 2023 में अमेरिका के 'एमजीएम रिसॉर्ट्स' पर हुआ हमला था। हैकरों ने कंपनी के कंप्यूटर नेटवर्क को हैक किया, जिससे होटल बुकिंग, डिजिटल चेक-इन, इलेक्ट्रॉनिक चाबियों और भुगतान जैसी सेवाओं में व्यवधान आया। होटल कारोबार को कई दिनों तक परेशानी झेलनी पड़ी।

फरवरी 2024 में अमेरिका की स्वास्थ्य भुगतान व्यवस्था को भी बड़ा झटका लगा। चेंज हेल्थकेयर पर रैनसमवेयर हमले के कारण अस्पतालों, फार्मेसियों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के भुगतान तथा दवा संबंधी प्रक्रियाएं प्रभावित हुईं। यह कंपनी अमेरिका की स्वास्थ्य व्यवस्था में बीमा दावों और भुगतान के प्रसंस्करण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके सिस्टम बाधित होने से कई अस्पतालों और फार्मेसियों को वैकल्पिक तरीके अपनाने पड़े।

वहीं, 22 जुलाई 2024 को क्रोएशिया के स्प्लिट एयरपोर्ट पर भी साइबर हमले की खबर सामने आई थी। एयरपोर्ट के आईटी सिस्टम प्रभावित हुए और कर्मचारियों को कुछ काम मैनुअल तरीके से करने पड़े। इससे उड़ानों के संचालन में व्यवधान आया। अगस्त 2024 में अमेरिका के सिएटल-टकोमा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर साइबर हमले के कारण चेक-इन, बैगेज हैंडलिंग और कुछ अन्य डिजिटल सेवाएं प्रभावित हुईं।

2025 में यह खतरा और स्पष्ट हुआ। 19 सितंबर 2025 को ब्रिटिश सरकार ने जगुआर लैंड रोवर पर हुए साइबर हमले के असर को लेकर कंपनी तथा ऑटोमोबाइल उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। हमले के कारण उत्पादन गतिविधियां प्रभावित हुईं और इसका असर कंपनी के आपूर्तिकर्ताओं तक पहुंचा।

इसी साल अप्रैल (2025) में ब्रिटेन की खुदरा कंपनी 'मार्क्स एंड स्पेंसर' ने साइबर अटैक की पुष्टि की। 13 मई 2025 को कंपनी ने बताया कि कुछ ग्राहकों का निजी डेटा चोरी हुआ है। इस घटना के कारण कंपनी की ऑनलाइन सेवाओं और कारोबार पर असर पड़ा। यह मामला सुपरमार्केट के फ्रिज पर हुए हमलों से अलग था, लेकिन दोनों घटनाएं बताती हैं कि आधुनिक रिटेल कारोबार की डिजिटल व्यवस्था पर हमला सीधे ग्राहकों और दुकानों तक असर डाल सकता है।

विमानन क्षेत्र में सबसे चर्चित घटनाओं में से एक 19 सितंबर 2025 को सामने आई, जब कोलिन्स एयरोस्पेस के म्यूज सॉफ्टवेयर पर साइबर हमले ने यूरोप के कई बड़े एयरपोर्ट्स की चेक-इन और बोर्डिंग व्यवस्था को प्रभावित किया। लंदन के हीथ्रो, ब्रुसेल्स और बर्लिन सहित कई एयरपोर्ट्स पर यात्रियों को परेशानी हुई। एयरलाइंस को कुछ प्रक्रियाएं मैनुअल तरीके से पूरी करनी पड़ीं।

अब 2026 में सुपरमार्केट के फ्रिज और फ्रीजर पर हुए हमले इस बदलते खतरे की नई कड़ी बन गए हैं। 12 अक्टूबर को फ्रांस में रेफ्रिजरेशन सिस्टम प्रभावित होने के बाद 2 नवंबर को यूरोप के सात देशों में ऐसी घटनाएं सामने आईं। कुछ उपकरणों में पुराने सॉफ्टवेयर और सुरक्षा अपडेट की कमी को संभावित कमजोरी माना जा रहा है।

साइबर हमलों की इस बदलती तस्वीर को समझने के लिए एक तकनीकी अंतर जानना जरूरी है। कंप्यूटर, वेबसाइट और डेटा सेंटर पर होने वाले हमलों को सामान्य तौर पर आईटी सिस्टम पर हमला कहा जाता है। इसके विपरीत मशीनों, औद्योगिक उपकरणों और भौतिक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने वाली तकनीक को ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी यानी ओटी कहा जाता है। बिजली संयंत्र, पानी की आपूर्ति, कारखाने, एयरपोर्ट के कुछ संचालन तंत्र और रेफ्रिजरेशन सिस्टम इसी व्यापक दायरे में आते हैं। ओटी पर हमला होने पर नुकसान केवल डेटा चोरी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि मशीनों का कामकाज प्रभावित हो सकता है।

--आईएएनएस

केआर/