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कब तक छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होता रहेगा: विनोद जाखड़

 

नई दिल्ली, 19 अगस्त (आईएएनएस)। नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) के प्रेसिडेंट विनोद जाखड़ ने तीन परीक्षाओं के रद्द होने, झारखंड पेपर लीक को लेकर छात्रों के विरोध-प्रदर्शन और राहुल गांधी पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू की टिप्पणी पर अपनी बात रखी।

विनोद जाखड़ ने बुधवार को समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि एनटीए (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) एक नाकाम संस्थान है और यह बात पूरे देश के छात्रों को पता है। पहले भी नीट का पेपर लीक हुआ, जिसकी वजह से 25 से ज्यादा स्टूडेंट्स ने आत्महत्या की, लेकिन एनटीए के ऊपर कोई कार्रवाई नहीं की गई थी।

उन्होंने कहा कि अभी हमने देखा कि बीते दिनों कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई। उन्हें बाहर निकाला गया है। इससे यह बात साबित हो गई है कि कहीं न कहीं एक बड़ी खामी एनटीए में थी। सरकार को एनटीए से ऐसा क्या मोह है कि वह अभी तक उसको बैन करने के ऊपर काम नहीं कर रही है?

उन्होंने आगे कहा कि इससे एक बात समझ आती है कि कहीं न कहीं एनटीए सरकार के भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है और वह केवल और केवल राजनीतिक इशारों पर काम करता है। सोशियोलॉजी, मैथमेटिक्स और कॉमर्स का जो यूजीसी नेट का पेपर था, उसके अंदर भारी खामी सामने आई। 2024 के प्रश्न पत्र से इंग्लिश और कॉमर्स के अंदर करीब 70 प्रतिशत सवाल पुराने पेपर से आए थे। ऐसे में बड़ा गंभीर सवाल उठता है कि एनटीए आखिर कर क्या रही है। उसको छात्रों के भविष्य का ही पता नहीं है। एनटीए को पता ही नहीं है कि कौन से पेपर का सवाल कब परीक्षा में पूछा जा चुका है।

एनएसयूआई के प्रेसिडेंट विनोद जाखड़ ने आगे कहा कि सोशियोलॉजी के छात्रों ने आरोप लगाया कि उनका पहले ही पेपर लीक हो चुका था। इन सभी दिक्कतों के लिए एनएसयूआई लगातार संघर्ष कर रही है, लेकिन जब तक एनटीए को बैन नहीं कर दिया जाता, हम लोग रुकने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी लगातार एनटीए के ऊपर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। एनएसयूआई ने भी लगातार इसके विरोध में आंदोलन किए हैं।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के लिए एक पारदर्शी और सही परीक्षा प्रणाली तैयार की जाए और एक सरकारी सिस्टम बनाया जाए, जिसके तहत इस देश में परीक्षाओं का आयोजन हो। इसकी मांग हम लोग कर रहे हैं।

उन्होंने रांची में छात्रों के आंदोलन पर बात करते हुए कहा कि इसमें राहुल गांधी ने छात्रों का लगातार समर्थन किया। एनएसयूआई ने भी वहां जाकर छात्रों की मदद की। वहीं, एक लंबे आंदोलन के बाद सीएम हेमंत सोरेन ने छात्रों की सभी मांगें मानीं। इसके लिए स्टूडेंट्स ने राहुल गांधी का आभार जताया, लेकिन रांची में अभी भी कुछ पुराने छात्र आंदोलन कर रहे हैं, जिनका नुकसान पुराना पेपर रद्द होने की वजह से हुआ है। ऐसे में सरकार को उनके लिए भी कोई रास्ता निकालना चाहिए। उनसे बातचीत करनी चाहिए।

हम लोग छात्रों के साथ खड़े हैं। इस देश के अंदर पेपर लीक के खिलाफ मजबूत कानून बनना चाहिए। कब तक छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होता रहेगा? छात्र जब आंदोलन करते हैं, अपने अधिकार की मांग करते हैं, तब उनको नक्सलवादी या नक्सल दिमागी कहा जाता है। उन्होंने कहा कि इस देश के विद्यार्थी सरकार से रोजगार भी मांगेंगे, और उनका अधिकार है कि सही प्रणाली के तहत पेपर कराया जाए।

देश के अंदर परीक्षाओं को लेकर पारदर्शी प्रणाली लागू हो। पेपर लीक रुके और एग्जाम के साथ जिस एजुकेशन सिस्टम को इस देश में ध्वस्त कर दिया गया है, उसके पुन: निर्माण करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बुधवार को सीडब्ल्यूसी की मीटिंग है। इसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं द्वारा छात्रों के मुद्दे पर गंभीरता से चर्चा की जाएगी।

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से देश में एजुकेशन इंस्टीट्यूशन को खत्म कर दिया गया है, चाहे स्कूलों का मामला हो, चाहे कॉलेज-यूनिवर्सिटी का हो या चाहे भर्ती-रोजगार का मामला हो, लगातार इस देश के विद्यार्थी, चाहे जेन-जी हो या जेन-अल्फा, तमाम छात्र सड़कों पर हैं।

उन्होंने स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर पर बात करते हुए कहा कि जैसे छात्र स्वतंत्रता दिवस मनाते हुए स्कूल की छत पर खड़े होते हैं, छत गिर जाती है। राजस्थान में भी छात्र आए दिन आंदोलन कर रहे हैं। कहीं स्कूलों में स्टाफ नहीं है, तो कहीं स्कूलों की दीवार में करंट आ रहा है। कई स्कूलों की स्थिति जर्जर है। पढ़ाने के लिए स्कूलों में शिक्षक नहीं होते। शैक्षणिक संस्थानों में इस प्रकार की तमाम खामियां जो हैं, अन्य राज्यों के अलावा उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ से भी सामने आई हैं।

उन्होंने कहा कि कॉलेज-यूनिवर्सिटी के छात्रों के साथ-साथ स्कूलों के बच्चे भी लगातार आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि हम केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू से पूछना चाहते हैं कि पुलवामा और उरी की जांच कहां है।

--आईएएनएस

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