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ज्येष्ठ अधिकमास सप्तमी पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती

 

उज्जैन, 23 मई (आईएएनएस)। ज्येष्ठ अधिकमास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर तड़के विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकालेश्वर के दरबार में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। पावन अवसर पर आयोजित विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती के दौरान पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान हो उठा।

बाबा की एक झलक पाने के लिए देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर था। दर्शन के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे भक्त महाकाल की भक्ति में लीन नजर आए। जैसे ही भस्म आरती के लिए मंदिर के पट खुले, श्रद्धालुओं का इंतजार खत्म हुआ और वे अपने आराध्य के दर्शन कर भावविभोर हो उठे।

परंपरा के अनुसार, सबसे पहले भगवान वीरभद्र से आज्ञा लेने के बाद मंदिर के कपाट खोले गए। इसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा बाबा का जलाभिषेक किया गया और फिर पंचामृत से स्नान कराया गया। पंचामृत स्नान के बाद बाबा महाकाल का बेहद मनमोहक और अलौकिक शृंगार किया गया। शनिवार के विशेष शृंगार में बाबा के मस्तक पर चंद्रमा, त्रिशूल और 'ऊं' की आकृति सजाई गई।

अभिषेक के बाद भस्म आरती का भव्य आयोजन हुआ। इस दौरान बाबा को भस्म अर्पित की गई और आरती उतारी गई। मान्यता है कि भस्म आरती के दौरान महाकाल भक्तों को निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। शृंगार पूर्ण होने के बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा को भस्म रमाई गई।

इसके बाद पूरे परिसर में 'जय श्री महाकाल' के जयकारे गूंज उठे। देश के कोने-कोने से आए भक्तों ने भस्म आरती में शामिल होकर बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया। पूरा मंदिर परिसर घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से गुंजायमान रहा। हर ओर भक्ति और आस्था का माहौल था।

मंदिर में बाबा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलती हैं। हालांकि, सामान्य दिनों में दर्शन के लिए सामान्य कतार में लगभग 30 से 45 मिनट का समय लगता है। त्योहारों और छुट्टियों के दौरान भीड़ अधिक हो सकती है।

--आईएएनएस

एनएस/एएस