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जस्टिस सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी मद्रास हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस नियुक्त

 

नई दिल्ली, 5 मार्च (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के बाद जस्टिस सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी को मद्रास हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश (चीफ जस्टिस) नियुक्त करने को मंजूरी दे दी।

केंद्रीय कानून और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद केरल हाई कोर्ट के जज जस्टिस सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी को मद्रास हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया है। यह नियुक्ति उनके पदभार संभालने की तारीख से प्रभावी होगी।

सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने 26 फरवरी को हुई अपनी बैठक में जस्टिस धर्माधिकारी को मद्रास हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की थी। कॉलेजियम की अगुवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत कर रहे थे।

जस्टिस धर्माधिकारी का मूल (पैरेंट) हाई कोर्ट मध्य प्रदेश हाई कोर्ट है और फिलहाल वे केरल हाई कोर्ट में जज के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें मद्रास हाई कोर्ट के मौजूदा चीफ जस्टिस मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव के 5 मार्च को सेवानिवृत्त होने के बाद यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।

9 जुलाई 1966 को रायपुर में जन्मे जस्टिस धर्माधिकारी को अप्रैल 2016 में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश (एडिशनल जज) नियुक्त किया गया था। बाद में 17 मार्च 2018 को उन्हें स्थायी न्यायाधीश (परमानेंट जज) बना दिया गया।

जज बनने से पहले जस्टिस सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में करीब 24 साल तक वकील के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने सिविल, क्रिमिनल और संवैधानिक मामलों में प्रैक्टिस की।

पिछले साल उनका तबादला मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से केरल हाई कोर्ट में कर दिया गया था। अप्रैल 2025 में केंद्रीय कानून और न्याय मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी कर बताया था कि भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 222 के तहत उनके तबादले को मंजूरी दे दी है।

सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर जारी बयान में कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 20 मार्च, 24 मार्च और 3 अप्रैल 2025 को हुई बैठकों में जस्टिस सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से केरल हाई कोर्ट में स्थानांतरित करने की सिफारिश की थी।

--आईएएनएस

डीएससी