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जेपीएससी परीक्षा रद्द मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित

 

रांची, 12 अक्टूबर (आईएएनएस)। झारखंड हाईकोर्ट में 11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षा रद्द करने के मामले में सुनवाई पूरी हो गई है और अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से महज 5 मिनट में बहस पूरी करने और हलफनामे में सबूत न होने को लेकर हस्तक्षेपकर्ताओं ने गंभीर सवाल उठाए। वहीं याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि रद्द करने के दिन सरकार के पास पर्याप्त साक्ष्य ही नहीं थे और जांच अधिसूचना के बाद शुरू हुई थी।

जेपीएससी की 11वीं और 13वीं परीक्षा को रद्द करने के हाईकोर्ट के फैसले पर हस्तक्षेपकर्ता के वकील कुमार हर्ष ने कहा, "सफल उम्मीदवारों की ओर से जो याचिकाकर्ता हैं, उनकी बहस पूरी तरह से खत्म हो गई थी। आज राज्य सरकार को अपना जवाब देना था। राज्य सरकार ने अपनी पूरी बहस खत्म करने में मात्र 5 मिनट लिए। हमने पहले भी यह आरोप लगाया था कि राज्य सरकार इस मामले में बहुत गंभीर नहीं दिख रही है। उनके द्वारा दायर किए गए हलफनामे में कोई सबूत या अनुलग्नक नहीं था। अपनी दलीलों में हमने यह बात रखी कि जो भी सबूत सामने आ रहे हैं, उन्हें लाना राज्य सरकार की जिम्मेदारी और कर्तव्य है।"

उन्होंने कहा कि हम शुरू से ही कह रहे हैं कि पारदर्शिता होनी चाहिए। जब हम पारदर्शिता, जवाबदेही और खुलेपन की बात करते हैं, तो इससे जनता का भरोसा बनता है। हमने यह बात अदालत के सामने भी रखी, कि सबूत सामने लाए जाने चाहिए थे। दरअसल, अदालत ने भी इस पर टिप्पणी की कि जांच कितने सालों तक चलती रहेगी, क्योंकि जांच अभी तक पूरी नहीं हुई है। इसके लिए राज्य सरकार जिम्मेदार है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अमृतांश वत्स पार्थी ने कहा, "जहां तक 11वीं से 13वीं जेपीएससी और खाद्य सुरक्षा अधिकारी मामलों की बात है, जिनका हम प्रतिनिधित्व कर रहे थे, अधिसूचना जारी होने के बाद भी खाद्य सुरक्षा अधिकारी मामले में जांच शुरू ही नहीं हुई थी। जहां तक 11वीं से 13वीं जेपीएससी की बात है, रद्द करने की अधिसूचना जारी होने के बाद ही जांच शुरू हुई।"

उन्होंने कहा कि इसका मतलब है कि जिस दिन आपने इसे रद्द किया, उस दिन आपके पास पर्याप्त सबूत नहीं थे। केवल एक बात थी कि टीडीपीएल किसी तरह जेपीएससी में शामिल था। हमने टीडीपीएल की संलिप्तता किस हद तक थी और किस स्तर पर थी, इस पर भी बहस की और कहा कि इसकी भी जांच होनी चाहिए।

जेपीएससी की 11वीं और 13वीं परीक्षा को रद्द करने के हाईकोर्ट के फैसले पर याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अमृतांश वत्स पार्थी ने कहा कि हमने अभी हलफनामा नहीं पढ़ा है, उसे पढ़ने के बाद ही बता पाएंगे कि उसमें क्या है। दूसरी बात सभी पक्षों की ओर से दलीलें पेश की गईं। सभी पक्षों की ओर से बहस हुई। अब अदालत क्या फैसला लेती है, यह उन पर निर्भर करता है।

उन्होने बताया कि सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पेश हुए अधिवक्ताओं ने अपनी दलीलें रखीं। इसके साथ ही एक अतिरिक्त रिपोर्ट और कैबिनेट रिपोर्ट भी सीलबंद लिफाफे में पेश की गई। उसके बाद कुछ हस्तक्षेपकर्ताओं की ओर से बहस हुई और अंत में दलीलें पूरी हुईं और फैसला सुरक्षित रख लिया गया।

--आईएएनएस

केके/वीसी