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जेपीएससी-जेएसएससी मामले में कोर्ट का फैसला मान्य होगा: कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा

 

रांची, 15 सितंबर (आईएएनएस)। कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने जेपीएससी और जेएसएससी सीजीएल समेत चार भर्ती परीक्षाओं के विज्ञापन रद्द करने के सरकारी नोटिफिकेशन को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई, ओबीसी आरक्षण, एमएमडीआर कानून, जीडीपी ग्रोध, भारत-चीन संबंध, समान नागरिक संहिता (यूसीसी), दिशा सालियन मामले और राम मंदिर से जुड़े विवाद पर केंद्र और भाजपा पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस विभिन्न मुद्दों को लेकर सड़क से लेकर न्यायालय तक संघर्ष जारी रखेगी।

जेपीएससी और जेएसएससी सीजीएल सहित चार भर्ती परीक्षाओं के विज्ञापन रद्द करने से जुड़े सरकारी नोटिफिकेशन को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर हाईकोर्ट में सुनवाई के सवाल पर राकेश सिन्हा ने कहा कि छात्रों के आंदोलन के बाद सरकार ने संवाद के माध्यम से उनकी मांगों पर निर्णय लिया था। छात्रों की मांग पर सीजीएल और जेपीएससी परीक्षा को रद्द किया गया था, लेकिन अब मामला न्यायालय में पहुंच चुका है।

उन्होंने कहा कि सरकार अदालत में अपना पक्ष रखेगी और न्यायालय का जो भी फैसला आएगा, वह सभी पक्षों के लिए स्वीकार्य होना चाहिए। लोगों का न्यायपालिका पर भरोसा है और अदालत के निर्णय का सम्मान किया जाना चाहिए।

ओबीसी मुद्दे पर कांग्रेस के कार्यक्रम को लेकर सिन्हा ने कहा कि पार्टी जातीय जनगणना में अलग से ओबीसी कॉलम शामिल करने की मांग लगातार करती रही है। इसका उद्देश्य देश में विभिन्न सामाजिक समूहों की वास्तविक संख्या सामने लाना और जनसंख्या के अनुपात में भागीदारी सुनिश्चित करने की बहस को मजबूत करना है। कांग्रेस के ओबीसी विभाग की ओर से हुंकार रैली आयोजित की जाएगी। बापू वाटिका से लोकभवन तक मार्च निकालने और प्रदर्शन के बाद राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपने की योजना है।

सिन्हा ने केंद्र सरकार पर ओबीसी समाज को राजनीतिक रूप से इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और कहा कि जातीय जनगणना में ओबीसी कॉलम को लेकर सरकार को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।

एमएमडीआर कानून को लेकर कांग्रेस के विरोध पर सिन्हा ने इसे झारखंड के हितों से जुड़ा मुद्दा बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि खनिज संसाधनों से जुड़े फैसलों का असर झारखंड की जमीन, पर्यावरण और विस्थापन पर पड़ता है, जबकि उससे मिलने वाले आर्थिक लाभ को लेकर राज्य के हितों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि झारखंड से जुड़े करीब 1.36 लाख करोड़ रुपए के बकाये का मुद्दा भी राज्य के लिए महत्वपूर्ण है। एमएमडीआर बिल को सदन के अंतिम दिन बिना पर्याप्त बहस के पारित कराया गया और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद इसे कानून का रूप दे दिया गया।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस 26 तारीख को लोकभवन मार्च करेगी और इसके बाद प्रखंड स्तर पर भी प्रदर्शन किए जाएंगे। पार्टी इस कानून को लेकर न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएगी। ग्राम सभाओं की शक्तियों पर भी इस कानून का असर पड़ सकता है।

जीडीपी ग्रोध के आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार पर 'जादुई आंकड़े' दिखाकर आर्थिक स्थिति को लेकर भ्रम पैदा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यदि अर्थव्यवस्था की वृद्धि इतनी मजबूत है तो आम लोगों को महंगाई से राहत क्यों नहीं मिल रही है। महंगाई के कारण ग्रामीण और शहरी परिवारों का घरेलू बजट प्रभावित हुआ है और रसोई का खर्च बढ़ा है। उन्होंने केंद्र सरकार से आर्थिक विकास के आंकड़ों के साथ रोजगार, महंगाई और आम आदमी की आय से जुड़े सवालों का भी जवाब देने की मांग की।

विदेश मंत्री एस जयशंकर के आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोहरे मानदंड नहीं अपनाने वाले बयान पर सिन्हा ने कहा कि आतंकवाद को किसी भी रूप में सही नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि जब देश में आतंकी घटनाएं हुईं तो विपक्ष ने सरकार और प्रधानमंत्री का समर्थन किया। पहलगाम हमले का जिक्र करते हुए उन्होंने सरकार से सवाल किया कि घटना के बाद जिम्मेदार आतंकियों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई। भारतीय सेना की कार्रवाई के बावजूद संघर्षविराम क्यों किया गया, इसका जवाब सरकार को देना चाहिए।

एनआरसी पर असदुद्दीन ओवैसी की आपत्तियों के संदर्भ में सिन्हा ने कहा कि एनआरसी और यूसीसी जैसे मुद्दों की चर्चा ऐसे समय में हो रही है जब देश महंगाई और बेरोजगारी जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भाजपा के सामने आर्थिक और रोजगार से जुड़े सवाल खड़े होते हैं तो वह धर्म और नागरिक कानूनों से जुड़े मुद्दों को सामने लाकर जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश करती है। अब जनता सरकार से महंगाई, बेरोजगारी और अर्थव्यवस्था पर सीधे जवाब चाहती है।

एलएसी पर चीन की सैन्य मौजूदगी में कमी की खबरों के बीच राकेश सिन्हा ने सावधानी बरतने की बात कही। उन्होंने कहा कि भारत को चीन पर पूरी तरह भरोसा नहीं करना चाहिए। अतीत में भारत और चीन के बीच भरोसे के बावजूद सीमा पर तनाव देखने को मिला है। उन्होंने चीन के पाकिस्तान के साथ संबंधों और भारत-चीन सीमा विवाद का हवाला देते हुए कहा कि भारत को अपनी सुरक्षा नीति में सतर्क रहना होगा। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि कूटनीतिक संबंध सुधारने की कोशिशों के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा पर भारत के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए।

यूसीसी को लेकर एनडीए में मतभेद के सवाल पर सिन्हा ने विशेष रूप से बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जदयू से अपना रुख स्पष्ट करने को कहा। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार बिहार में यूसीसी लागू करने का प्रस्ताव लाती है और जदयू इसका विरोध करती है, तो उसे यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह सरकार से समर्थन वापस लेगी या नहीं। केवल केंद्र के नेताओं से मुलाकात या तस्वीर खिंचवाने से बात नहीं बनेगी, बल्कि जदयू को ठोस राजनीतिक निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने नीतीश कुमार से कहा कि यदि पार्टी यूसीसी के खिलाफ है तो उसे सरकार के साथ अपने समर्थन को लेकर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।

दिशा सालियन की मौत के मामले में सीबीआई की ओर से एफआईआर दर्ज किए जाने पर सिन्हा ने केंद्र सरकार पर जांच एजेंसियों के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मामले में आदित्य ठाकरे समेत अन्य लोगों के नाम चर्चा में आने के बाद जांच को लेकर राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। जब विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी और अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरता है तो सीबीआई और ईडी जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्ष पर दबाव बनाने के लिए किया जाता है। विपक्ष किसी दबाव में नहीं आएगा और जनता के मुद्दों को लेकर अपनी लड़ाई जारी रखेगा।

राम मंदिर के सीईओ के चयन को लेकर उठे विवाद के बीच सिन्हा ने राम मंदिर से जुड़े अन्य मामलों का उल्लेख करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी के मामले में कार्रवाई और कुछ लोगों को क्लीन चिट दिए जाने का मुद्दा उठाया। सिन्हा ने कहा कि राम मंदिर से जुड़े मामलों में पूरी पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। यह विषय करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा है और इसलिए मंदिर प्रशासन तथा सरकार को हर मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए।

--आईएएनएस

पीएसके