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खेतों की मिट्टी से आईएएस तक का सफर: फलोदी के मयंक पुरोहित ने UPSC में हासिल की ऑल इंडिया 33वीं रैंक

 

खेतों की मिट्टी से देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवा तक पहुंचना हर किसी के लिए आसान नहीं होता, लेकिन फलोदी के होनहार युवा मयंक पुरोहित ने यह कर दिखाया। एक साधारण किसान परिवार से आने वाले मयंक ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा में ऑल इंडिया 33वीं रैंक हासिल कर आइएएस बनने का सपना साकार किया।

मयंक की यह सफलता उनके परिवार और पूरे इलाके के लिए गर्व की बात है। उन्होंने बताया कि शुरुआती दिनों में परिस्थितियां साधारण थीं, लेकिन उनके माता-पिता ने शिक्षा और मेहनत को प्राथमिकता दी। मयंक ने अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ निश्चय रखा और कठिन परिस्थितियों में भी पढ़ाई जारी रखी।

मयंक ने अपनी तैयारी के दौरान विषयों की गहन समझ और नियमित अभ्यास को सबसे महत्वपूर्ण माना। उन्होंने प्रारंभिक परीक्षा के लिए अच्छी तैयारी के साथ-साथ करंट अफेयर्स पर विशेष ध्यान दिया। एनसीईआरटी की किताबों और विश्वसनीय स्रोतों से ज्ञान को मजबूत किया और समय-समय पर मॉक टेस्ट देकर अपनी कमजोरियों को सुधारते रहे।

मुख्य परीक्षा के लिए उन्होंने उत्तर लेखन का अभ्यास नियमित रूप से किया। उनका मानना है कि लिखित परीक्षा में उत्कृष्टता पाने के लिए केवल जानकारी होना पर्याप्त नहीं, बल्कि उसे स्पष्ट और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना भी जरूरी है।

साक्षात्कार की तैयारी के लिए मयंक ने व्यक्तित्व विकास, सोचने की क्षमता और आत्मविश्वास पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि इंटरव्यू में केवल ज्ञान नहीं, बल्कि आपकी सोच, संवाद क्षमता और आत्मविश्वास भी परखा जाता है।

मयंक की इस सफलता में उनके माता-पिता, शिक्षकों और दोस्तों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनके अनुसार परिवार का सहयोग और मार्गदर्शन उनकी प्रेरणा का स्रोत था। कठिन समय में परिवार ने उनका मनोबल बनाए रखा और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

फलोदी और आसपास के युवाओं के लिए मयंक का उदाहरण प्रेरणादायक है। उनकी कहानी यह साबित करती है कि सही दिशा में मेहनत, लगन और दृढ़ निश्चय से कोई भी सपना सच किया जा सकता है।

मयंक का लक्ष्य अब प्रशासनिक सेवा के माध्यम से समाज और देश की सेवा करना है। उनका कहना है कि वे ग्रामीण और कमजोर वर्गों के कल्याण, शिक्षा और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में सुधार लाना चाहते हैं।

इस सफलता ने यह संदेश भी दिया कि कठिन मेहनत, लक्ष्य के प्रति समर्पण और निरंतर प्रयास से साधारण पृष्ठभूमि से आने वाला युवा भी देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवा में अपना नाम दर्ज कर सकता है। मयंक पुरोहित की यह उपलब्धि क्षेत्र और परिवार दोनों के लिए गौरव का क्षण है।