जो दिखेगा वही बिकेगा’, जन भवन मॉडल से बदलेगी प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था: मुख्यमंत्री योगी
लखनऊ, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जन भवन में आधुनिक सुविधाओं से युक्त आदर्श माध्यमिक विद्यालय के नवीन भवन का उद्घाटन करते हुए कहा कि “जो दिखेगा वही समाज में बिकेगा” और इसी सोच के साथ शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर मॉडल प्रस्तुत करने की जरूरत है।
उन्होंने इस पहल को पूरे प्रदेश में लागू करने पर जोर दिया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को जन भवन में आधुनिक सुविधाओं से युक्त आदर्श माध्यमिक विद्यालय के नवीन भवन का उद्घाटन करते हुए इसे शिक्षा क्षेत्र में एक अभिनव और अनुकरणीय मॉडल बताया।
उन्होंने कहा कि इस मॉडल को प्रदेश के सभी जनपदों में लागू कर शिक्षा की गुणवत्ता को नई दिशा दी जा सकती है। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि जो दिखेगा वही समाज में बिकेगा” इसलिए शिक्षा संस्थानों को बेहतर ढंग से प्रस्तुत करना जरूरी है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए सबसे पहली आवश्यकता एक सुदृढ़ और आधुनिक भवन की होती है, जिससे अनुकूल शैक्षिक वातावरण तैयार होता है।
उन्होंने बताया कि इस अत्याधुनिक विद्यालय भवन के निर्माण पर कुल 5 करोड़ 17 लाख रुपये खर्च हुए हैं, जिसमें से 4 करोड़ 70 लाख रुपये राज्य सरकार द्वारा दिए गए, जबकि शेष राशि सीएसआर और राज्यपाल के प्रयासों से जुटाई गई है। मुख्यमंत्री ने इस पहल को राज्यपाल द्वारा प्रस्तुत एक उत्कृष्ट “मॉडल” करार देते हुए कहा कि इसे सीएम कम्पोजिट विद्यालयों में भी अपनाया जाना चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अन्य जिलों के लोगों को यहां लाकर इस मॉडल का अवलोकन कराया जाए। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने जन भवन की गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा कि यहां बच्चों के खेलकूद और विभिन्न रचनात्मक कार्यक्रम आयोजित होते हैं, जिससे उनके सर्वांगीण विकास को बढ़ावा मिलता है।
उन्होंने उल्लेख किया कि पहली बार राजभवन की टीम जनभवन के रूप में गणतंत्र दिवस परेड में भी शामिल हुई है। मुख्यमंत्री ने संस्कृत श्लोक “अमंत्रमक्षरं नास्ति…” का उल्लेख करते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति अयोग्य नहीं होता, बल्कि उसे सही दिशा देने वाला “योजक” आवश्यक होता है, और शिक्षा इस भूमिका को निभाती है।
भारतीय वैज्ञानिक परंपरा का जिक्र करते हुए, उन्होंने आर्यभट्ट, सुश्रुत, चरक, जगदीश चंद्र बसु और सीवी रमन का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा ने विश्व को नई दिशा दी है, जिसे आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी वर्तमान पीढ़ी की है। उन्होंने कहा कि भारत के वह वैज्ञानिक जिन्होंने शून्य व खगोल की अद्भुत अवधारणाएं दीं, वह कोई और नहीं, आर्यभट्ट थे।
आकाश के रहस्यों को पहली बार उद्घाटित करने वाले वराहमिहिर थे। जो आज की सर्जरी है,केवल आयुर्वेद ही नहीं एलोपैथी भी जिन्हें आदर्श मानता है वह सुश्रुत थे। चरक जिन्होंने आयुर्वेद को विज्ञान का स्वरूप कैसे दिया जाना चाहिए यह चरक ने हमे बताया। जगदीश चन्द्र बसु इन्होंने विज्ञान में नए आयाम जोड़े, मनुष्य,जीव ही नही वनस्पति में भी जीव का अंश है,यह वैज्ञानिक बसु ने बताया। प्रकाश का रहस्य क्या होता है यह सीवी रमन ने हमे बताया है।
--आईएएनएस
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