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जेएनयू में यौन उत्पीड़न के आरोपी प्रोफेसर को बचाने और भ्रामक सूचनाएं फैलाने के कांग्रेस-लेफ्ट के प्रयास निंदनीय: अभाविप

 

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर (आईएएनएस)। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में छात्राओं द्वारा यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे कांग्रेस सांसद प्रोफेसर के मामले में कांग्रेस-लेफ्ट इकोसिस्टम से जुड़े कुछ लोगों द्वारा आरोपी को बचाने, भ्रामक सूचनाएं फैलाने और मूल मुद्दे से ध्यान भटकाने के प्रयास निंदनीय हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) छात्राओं की सुरक्षा, गरिमा और न्याय के प्रश्न पर सदैव मुखर रही है।

इस मामले में भी अभाविप की स्पष्ट मांग है कि शिकायतों की निष्पक्ष जांच हो, जांच प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का राजनीतिक हस्तक्षेप न हो तथा जो भी दोषी पाया जाए, उसके विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

इस प्रकरण में जेएनयू की आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) की कार्यप्रणाली और जांच में हुई देरी गंभीर सवाल खड़े करती है। कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न अधिनियम, 2013 की धारा 11(4) के अनुसार जांच 90 दिनों के भीतर पूरी की जानी चाहिए तथा धारा 13(4) के अनुसार जांच पूरी होने के 10 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत की जानी चाहिए। इसके बावजूद, शिकायतों के सामने आने के बाद लगभग चार महीने तक जांच की प्रगति को लेकर सवाल बने रहे। मामला सामने आने और जांच में देरी पर अभाविप द्वारा आवाज उठाए जाने के बाद ही इस प्रकरण में कार्रवाई की दिशा में तेजी आने की खबरें सामने आईं। अभाविप ने विरोध प्रदर्शन कर जांच में तेजी लाने, शिकायतकर्ताओं को सुरक्षा प्रदान करने और आरोपी को जांच प्रभावित करने से रोकने की मांग की थी।

ऐसे में जांच में देरी और समिति की जवाबदेही पर सवाल उठाने के बजाय कांग्रेस-लेफ्ट इकोसिस्टम से जुड़े कुछ लोगों द्वारा अभाविप की भूमिका को लेकर भ्रामक सूचनाएं फैलाना और कथित पत्रों एवं दावों के माध्यम से मामले को दूसरी दिशा में ले जाने का प्रयास करना दुर्भाग्यपूर्ण है। यह गंभीर चिंता का विषय है कि छात्राओं द्वारा लगाए गए आरोपों और जांच में देरी जैसे मूल प्रश्नों पर जवाबदेही तय करने की जगह आरोपी को बचाने का प्रेस हो रहा है।

अभाविप स्पष्ट करती है कि वह ऐसे किसी भी प्रयास को सफल नहीं होने देगी, जिसके माध्यम से राजनीतिक संबंधों के आधार पर आरोपी को बचाने या शिकायतकर्ताओं की आवाज को कमजोर करने का प्रयास किया जाए। अभाविप मांग करती है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो, शिकायतकर्ताओं को किसी भी प्रकार के दबाव से सुरक्षा मिले और जांच को प्रभावित करने अथवा भ्रामक सूचनाएं फैलाकर न्याय की प्रक्रिया में बाधा डालने के मामलों की भी नियमानुसार जांच की जाए।

अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा, "कांग्रेस-लेफ्ट से जुड़े कुछ लोगों द्वारा इस गंभीर मामले में भ्रामक सूचनाएं फैलाकर अभाविप को बदनाम करने और मूल मुद्दे से ध्यान भटकाने का प्रयास किया जा रहा है। जब अभाविप ने जांच में देरी पर सवाल उठाए और छात्राओं को न्याय दिलाने की मांग की, तब इस विषय पर जवाबदेही तय करने की जगह भ्रम फैलाना दुर्भाग्यपूर्ण है। छात्राओं की सुरक्षा और न्याय से बढ़कर कोई राजनीतिक हित नहीं हो सकता। अभाविप की मांग स्पष्ट है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो, शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए तथा जो भी दोषी पाया जाए, उसके विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई हो। आरोपी को बचाने और न्याय के मूल प्रश्न से ध्यान भटकाने के किसी भी प्रयास का अभाविप पुरजोर विरोध करेगी।"

--आईएएनएस

डीकेपी/