जेएनयू में ब्राह्मणवाद के खिलाफ लगे नारे, एबीवीपी का पलटवार-यूनिवर्सिटी बर्बादी के नारे लगाने की फैक्ट्री नहीं
नई दिल्ली, 30 जनवरी (आईएएनएस)। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) एक बार फिर चर्चा में आया है। सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगा दी है। इस फैसले के खिलाफ जेएनयू के कुछ लेफ्ट विचारधारा वाले छात्रों और अन्य संगठनों ने साबरमती ढाबे के पास विरोध प्रदर्शन किया। करीब 50 छात्र जमा हुए और ब्राह्मणवाद का प्रतीकात्मक पुतला जलाया और ब्राह्मणवाद मुर्दाबाद के नारे लगाए।
लेफ्ट विंग के छात्रों के प्रदर्शन को एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने कहा कि जेएनयू करदाताओं के पैसे से चलने वाला विश्वविद्यालय है न कि जेएनयू बर्बादी के नारे लगाने वाली फैक्ट्री है।
एबीवीपी से जुड़े प्रियांशु ने कहा कि लेफ्ट विंग के प्रदर्शन में भाजपा और संघ बर्बाद हो जाएंगे' जैसे नारे लगाए। साथ ही उन्होंने दूसरे समाजों के लोगों के खिलाफ और जातिवाद के नाम पर भी नारे लगाए। बर्बादी के नारों से लेफ्ट समाज में विद्रोह फैलाना चाहता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र हमें अपनी बात रखने की आजादी देता है, लेकिन लेफ्ट वाले लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाने का काम करते हैं। ऐसे शब्दों का प्रयोग करते हैं, जो लोकतंत्र की मर्यादा की साफतौर पर अवेहलना करता है। जेएनयू टैक्सपेयर के पैसे से चलने वाली यूनिवर्सिटी है, बर्बादी के नारे लगाने की फैक्ट्री नहीं।
जेएनयू से पीएचडी कर रहे कृष्णकांत द्विवेदी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के स्टे बाद लेफ्ट का इकोसिस्टम बौखला गया था, क्योंकि स्टे से पहले वे समर्थन दे चुके थे। स्टे के बाद उनकी मानसिक स्थिति हिल गई थी। जेएनयू में प्रोटेस्ट के दौरान संघ और भाजपा के खिलाफ नारे लगाए गए। मैं पूछना चाहता हूं कि क्या ये लाखों स्वयंसेवकों की कब्र खोदना चाहते हैं? यह प्रोटेस्ट पूरी तरह शर्मनाक है। इसमें एबीवीपी और संघ के लिए आपत्तिजनक शब्द का प्रयोग किया गया। पूरे देश को दो भागों में तोड़ने की बात की गई। यह पूर्ण रूप से शर्मनाक है।
जेएनयूएसयू द्वारा आयोजित प्रदर्शन में लेफ्ट विंग के कार्यकर्ताओं का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूजीसी के नए नियम पर लगाया गया स्टे ब्राह्मणवाद और मनुवाद को सपोर्ट करता है।
--आईएएनएस
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