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जेएनयू हंगामा: एबीवीपी छात्रों का आरोप- 400 से अधिक वामपंथी समर्थकों ने हमला किया, अधिकतर लोग बाहरी

 

नई दिल्ली, 23 फरवरी (आईएएनएस)। दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) एक बार फिर विवादों में है। सोमवार की रात जेएनयू में एबीवीपी और लेफ्ट समर्थकों के बीच झड़प और पत्थरबाजी हुई। इस घटना में घायल 12-14 छात्रों को सफदरजंग अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में भर्ती कराया गया।

जेएनयू मीडिया संयोजक विजय जायसवाल ने बताया कि रात के करीब 3 बजे वामपंथी समर्थित छात्रों ने हमला किया। वामपंथी गुट, जिनका पिछले 7-8 दिनों से विरोध प्रदर्शन चल रहा था, वे साबरमती टी-पॉइंट से कुलपति गेट तक मार्च कर रहे थे। इनका पहले से प्लान था कि इन्हें एबीवीपी के कार्यकर्ताओं पर हमला करना था। इसी के तहत वामपंथी गुट के छात्र स्कूल एरिया में गए और अन्य छात्रों के साथ झड़प की।

विजय जायसवाल ने कहा कि रात में मॉब लिंचिंग जैसी हरकतें की गईं। दूसरे गुट के छात्र नकाब में आए थे और उन्होंने रॉड-डंडे से हमले किए। उन्होंने आरोप लगाया कि लगभग 400 की संख्या में लोग आए थे, जिनमें विरोधी छात्रों की संख्या कम थी और वामपंथी लोग अधिक थे। उन्होंने बताया कि कुछ लोगों के चेहरे वीडियो में देखे गए हैं, जो जेएनयू के छात्र नहीं हैं।

एबीवीपी के घायल छात्रों में शामिल प्रतीक भारद्वाज ने पूरी घटना के बारे में बताया। उन्होंने कहा, "मुझे नहीं पता कि मैं किस फ्लोर पर था। खुद को बचाने के लिए मैं इधर-उधर भागा। एक बाथरूम खुला हुआ था। मैंने उसे अंदर से बंद कर लिया। करीब आधे घंटे बाद, कम से कम 150 लोगों का एक ग्रुप आया। उन्होंने देखा कि दरवाजा बंद है और उसे तोड़ना शुरू कर दिया। उन्होंने दरवाजे में एक छेद किया और बाथरूम को फायर एक्सटिंग्विशर से निकले धुएं और पाउडर से भर दिया। मेरे पास उस समय ली गई तस्वीरें भी हैं।"

प्रतीक भारद्वाज ने बताया कि बाद में जेएनयू की सिक्योरिटी वहां पर पहुंची और उन्होंने मुझे बाहर निकाला। दूसरे गुट के लोग पुलिस के साथ भी बहस कर रहे थे। वहां एबीवीपी के कुछ और छात्र भी तब तक पहुंच गए। मुझे निकालने के बाद अस्पताल भेजा गया था। बेहतर में सुधार हुआ है, लेकिन पूरी तरह से स्वस्थ नहीं हूं।

एबीवीपी जेएनयू यूनिट के वाइस प्रेसिडेंट मनीष चौधरी ने कहा, "रात में एक ग्रुप ने यूनिवर्सिटी में लगी पाबंदियों के खिलाफ प्रोटेस्ट किया और वाइस चांसलर के घर पर धरने का भी ऐलान किया। आम तौर पर, किसी भी प्रोटेस्ट का नोटिस 48 घंटे पहले दिया जाना चाहिए, जो नहीं हुआ। वे कैंपस में आए, और क्योंकि रेगुलर स्टूडेंट्स उनके प्रोटेस्ट में हिस्सा नहीं ले रहे थे, इसलिए उन्होंने विक्टिम कार्ड खेलने का फैसला किया।"

मनीष चौधरी ने कहा कि प्रदर्शन करने आए छात्र कैंपस में जगह-जगह ताला लगाने लगे थे और अन्य छात्रों से बदसलूकी कर रहे थे। विवाद बढ़ने पर यहां पत्थरबाजी हुई और इसमें एबीवीपी के कई छात्र घायल हुए।

--आईएएनएस

डीसीएच/