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सैयद आगा रूहुल्लाह का छलका दर्द, बोले- हर दिन इस्तीफा देने को कहा जाता है, पार्टी ने खुद लड़ाई कमजोर की

 

श्रीनगर, 22 अगस्त (आईएएनएस)। श्रीनगर से जेकेएनसी सांसद सैयद आगा रूहुल्लाह ने पार्टी के भीतर चल रही खींचतान पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उन्हें लोगों का जनादेश मिला है और वह उसी के लिए संसद से सड़क तक लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन रोज उनसे इस्तीफा मांगा जाता है। सैयद आगा रूहुल्लाह ने कहा कि पार्टी ने खुद ही इस लड़ाई को कमजोर किया है और बिना नोटिस के उनके खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है, जिससे कार्यकर्ताओं में कन्फ्यूजन है।

सैयद रूहुल्लाह मेहदी ने कहा, "मैंने जनता के मुद्दों को आगे बढ़ाने की कोशिश की है, जिसके लिए मुझे अधिकार मिला था। मुझे सिर्फ पार्टी का टिकट नहीं मिला, मुझे लोगों ने अधिकार भी दिया है। इसके लिए मैंने पार्लियामेंट के अंदर, पार्लियामेंट के बाहर, सड़कों पर, कॉन्स्टिट्यूशन क्लब और जंतर-मंतर पर कोशिशें की हैं। मैंने दूसरी पार्टियों के साथ लॉबी करने की भी कोशिश की। हर दिन मुझसे कहा जाता है कि आप इस्तीफा दे दो। मैं उनसे चाहता हूं कि वो उस लड़ाई को लड़ने में मेरा साथ दें, जो हम लड़ रहे हैं, जिसके लिए लोगों ने वोट दिया। उन्होंने इस लड़ाई को खुद कमजोर किया है।"

जेकेएनसी सांसद ने कहा कि आपने देखा होगा कि जिस मेहनत, लॉबिंग, प्रयास और मुद्दे के लिए मुझे जनादेश मिला है कि मैं राज्य की संवैधानिक गारंटियों की बात करूं, उसका प्रतिबिंब और नतीजा कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में भी देखने को मिला। लगभग सभी विपक्षी राजनीतिक दलों ने अपने सदस्यों को भेजा। राज्य का दर्जा बहाल करने से जम्मू-कश्मीर के मसलों का हल नहीं हो सकता है। कश्मीर का स्टेटस यहां के लोगों की इच्छा के मुताबिक रिस्टोर करना है। आपको संवैधानिक गारंटियों और सुरक्षाओं को बहाल करना पड़ेगा। आपको लोगों के साथ बैठना पड़ेगा। मुझे जो जनादेश मिला है, उस पर मैंने काम किया है।

उन्होंने कहा कि ये लोग जवाबदेही तय नहीं कर पा रहे हैं। वो कम से कम एक नोटिस निकालते, मुझसे पूछते कि आपने इन-इन जगहों पर पार्टी के नियमों और विचारधारा का उल्लंघन किया है, तो मैं उसका जवाब दे पाता। ये एक माहौल बनाया गया। पार्टी के वरिष्ठ खुद नहीं कह पाते हैं, दूसरों से कहलवाते हैं। इस वजह से अपने ही लोगों के बीच कन्फ्यूजन है।

सैयद रूहुल्लाह मेहदी ने आरक्षण के मुद्दे पर कहा, "इसी साल हमने प्रदर्शन करने की कोशिश की तो छात्रों के हॉस्टल पर छापे मारे गए। उसके बाद वह डर गए। छात्रों ने कहा था कि हम मीडिया के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। उन्हें डराया गया। मैंने कहा कि आपको डरने की जरूरत नहीं है। आप मेरे घर आकर मीडिया से बात कीजिए, इसलिए मैंने पोस्ट किया था कि आप डर को निकाल दीजिए।"

उन्होंने आगे कहा कि मैं कोशिश करूंगा कि कोई भी पीएसए, यूएपीए लगाने की हिम्मत न करे। अगर छात्र शांतिपूर्ण रूप से अपने हक के लिए बाहर आते हैं, मैं उनके लिए लड़ूंगा। एक दिन हमें इस डर को निकालना है। विरोध करना हमारा हक है। वह हिम्मत करें, मैं उनके साथ आऊंगा। छात्रों के साथ अभिभावक भी बाहर आएं। यह लड़ाई मैंने छोड़ी नहीं है।

--आईएएनएस

केके/डीकेपी