झारखंड : 'ऑपरेशन नवजीवन' के तहत छह इनामी नक्सली कमांडरों समेत 16 माओवादियों ने डाले हथियार
रांची, 28 जुलाई (आईएएनएस)। झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को पुलिस और सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी मिली है। एजेंसियों के 'ऑपरेशन नवजीवन' के तहत 39 लाख रुपये के इनामी छह शीर्ष माओवादी कमांडरों समेत कुल 16 नक्सलियों ने रांची स्थित पुलिस मुख्यालय में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया।
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने अपने हथियार और भारी मात्रा में गोला-बारूद भी सुरक्षा बलों को सौंप दिया। इस दौरान डीजीपी तदाशा मिश्र, एडीजी मनोज कौशिक, आईजी साकेत सिंह, आईजी पंकज कंबोज, आईजी अभियान नरेंद्र सिंह, आईजी अनूप बिरथरे समेत कई अधिकारी उपस्थित रहे।
आत्मसमर्पण करने वालों में 15 लाख रुपये का इनामी रीजनल कमेटी सदस्य संतोष उर्फ बासुदेव दा उर्फ गांधी उर्फ दिलीप उर्फ संजय महतो, 10 लाख रुपये का इनामी जोनल कमेटी सदस्य चंदन लोहरा, पांच-पांच लाख रुपये के इनामी सब-जोनल कमेटी सदस्य अनिल तुरी उर्फ उज्ज्वल और सुखलाल बिरंजिया उर्फ अकेला, दो-दो लाख रुपये के इनामी एरिया कमेटी सदस्य सुदेश होनहागा उर्फ सोनाराम और रिसिव सोय शामिल हैं।
इसके अलावा संतोष मांझी उर्फ जगबंधु, जयकांत मुंडा उर्फ गूंगा उर्फ बंगाली, राजनाथ हांसदा उर्फ गुना हांसदा, एतवारी मांझी उर्फ सोनोत उर्फ संत, देवान मुर्मू उर्फ शनिचरवा, सुमित्रा सुरीन, चंपा मंझियाइन उर्फ गुड़िया, सालमी मुंडा उर्फ पारूल, मुन्नी सुरीन उर्फ मुरीन सुरीन और सीता मुंडा ने भी हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। देवान मुर्मू को एक करोड़ रुपये के इनामी शीर्ष माओवादी नेता मिसिर बेसरा का मुख्य अंगरक्षक माना जाता रहा है।
आत्मसमर्पण के दौरान नक्सलियों ने छह इंसास राइफल, दो एके-47 राइफल, एक एचके-33 राइफल, एक यूएस कार्बाइन और एक एम-16 राइफल समेत कुल 11 आधुनिक हथियार जमा किए। इसके अलावा 38 मैगजीन और 1,562 जीवित कारतूस भी सुरक्षा बलों को सौंपे गए।
पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले इन 16 नक्सलियों के खिलाफ झारखंड के विभिन्न जिलों में हत्या, पुलिस और सुरक्षाबलों पर हमले, लेवी वसूली, विस्फोट और अन्य नक्सली गतिविधियों से जुड़े कुल 425 मामले दर्ज हैं। इनमें संतोष उर्फ बासुदेव दा के खिलाफ सबसे अधिक 128 मामले दर्ज हैं, जबकि चंदन लोहरा के खिलाफ 78 मामले लंबित हैं। सुदेश होनहागा, रिसिव सोय, अनिल तुरी और सुखलाल बिरंजिया के खिलाफ भी कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।
झारखंड पुलिस का कहना है कि लगातार चल रहे नक्सल विरोधी अभियान, सुरक्षा बलों के दबाव और राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के कारण बड़ी संख्या में उग्रवादी हिंसा का रास्ता छोड़ रहे हैं। आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों को राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आर्थिक सहायता, कौशल विकास, रोजगार के अवसर और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि वे सामान्य जीवन जी सकें।
--आईएएनएस
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