झारखंड: नेतरहाट की नाशपाती अब देश के बड़े बाजारों में, महिला किसानों को मिल रहा बेहतर दाम
रांची, 1 सितंबर (आईएएनएस)। झारखंड के लातेहार जिले के नेतरहाट की नाशपाती अब स्थानीय बाजारों से निकलकर देश के बड़े और संगठित बाजारों तक पहुंच रही है। झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) की पहल से महिला किसानों के उत्पादक संगठनों को बड़े खरीदारों से जोड़ा जा रहा है।
इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर दाम मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
जेएसएलपीएस के एसईटीयू (स्केलिंग एंड इनेबलिंग फॉर ट्रेड अपलिफ्टमेंट) सेल की पहल के तहत अब तक करीब पांच मीट्रिक टन नाशपाती संगठित खरीदारों तक पहुंचाई जा चुकी है। करीब 10 मीट्रिक टन नाशपाती की एक और खेप असम के गुवाहाटी भेजने की तैयारी है। इस पूरी प्रक्रिया में किसानों की उपज को एक जगह इकट्ठा करने के साथ उसकी ग्रेडिंग, छंटाई और क्वालिटी जांच की जा रही है। इसके बाद आधुनिक पैकेजिंग और बेहतर ट्रांसपोर्ट व्यवस्था के जरिए नाशपाती को बड़े बाजारों तक भेजा जा रहा है। इससे किसानों को स्थानीय हाट-बाजारों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
पहले किसानों को अपनी उपज स्थानीय बाजारों में ही बेचनी पड़ती थी, जहां खरीदार सीमित होने के कारण उन्हें कई बार मनमानी कीमत का सामना करना पड़ता था। संगठित बाजार से जुड़ने के बाद उपज की क्वालिटी और मात्रा के आधार पर बेहतर खरीदारों तक पहुंच बन रही है। इससे महिला किसान समूहों को आगे भी बड़े स्तर पर उत्पादन और बाजार विस्तार के लिए प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
एग्री अर्जुना के जरिए नेतरहाट की नाशपाती संगठित रिटेल चेन तक पहुंच रही है। इसमें रिलायंस भी शामिल है। वहीं, टिंचर एग्री के जरिए नाशपाती की अतिरिक्त खेप देश के प्रीमियम घरेलू बाजारों में भेजी जा रही है। नेतरहाट की ठंडी जलवायु नाशपाती की खेती के लिए अनुकूल मानी जाती है।
यह इलाका झारखंड के प्रमुख नाशपाती उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है। किसानों को बड़े खरीदारों से सीधे जोड़ने की इस पहल से स्थानीय स्तर पर उनकी कमाई बढ़ाने और नाशपाती को झारखंड के प्रमुख बागवानी उत्पाद के रूप में पहचान दिलाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
--आईएएनएस
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