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झारखंड में जिम्मेदार लोगों की क्यों नहीं हो रही गिरफ्तारी, सीएम दें जवाब: दिलीप घोष

 

कोलकाता, 7 अगस्त (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री दिलीप घोष ने झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थियों के विरोध-प्रदर्शन, परीक्षा में पेपर लीक के मामलों, परिसीमन, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की टिप्पणियों सहित कई राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय रखी।

झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थियों के विरोध-प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए केवल संबंधित मंत्री ही नहीं, बल्कि राज्य के मुख्यमंत्री को भी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। पूरा मामला गंभीर है, लेकिन अब तक दोषियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जिम्मेदार लोगों की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई और सरकार निष्पक्ष जांच का भरोसा देने के लिए आगे क्यों नहीं आ रही है। सरकार ने इस पूरे मुद्दे को राजनीतिक विवाद बना दिया है, जबकि छात्रों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता होना चाहिए।

दिलीप घोष ने पेपर लीक के मुद्दे पर कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन किया गया, लेकिन जिन राज्यों में बार-बार परीक्षा के पेपर लीक हुए, वहां उसी तरह के विरोध प्रदर्शन नहीं दिखाई दिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि विपक्ष वास्तव में छात्रों के भविष्य को लेकर गंभीर है, तो उसे सभी राज्यों में समान रूप से आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का उद्देश्य केवल मीडिया का ध्यान आकर्षित करना और सुर्खियां बटोरना था।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पहले ही पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए कानून बना चुकी है। उनके अनुसार अब राज्य सरकारों की भी जिम्मेदारी है कि वे इस दिशा में कठोर कानून बनाएं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करें ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

परिसीमन के मुद्दे पर दिलीप घोष ने कहा कि यह एक सामान्य संवैधानिक प्रक्रिया है, जो समय-समय पर होती रही है। कई राज्य पहले ही परिसीमन की प्रक्रिया से गुजर चुके हैं और पश्चिम बंगाल में भी यह पहले हो चुका है। उनके अनुसार जनगणना पूरी होने के बाद पूरे देश में परिसीमन की प्रक्रिया शुरू होगी और बढ़ती आबादी के अनुरूप संसदीय सीटों की संख्या तय की जाएगी। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि जिन राज्यों को पहले परिसीमन का लाभ मिला, वही अब राष्ट्रीय स्तर पर इसका विरोध कर रहे हैं, जो विरोधाभासी है।

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की जेन जी और युवाओं को लेकर की गई टिप्पणी का समर्थन करते हुए दिलीप घोष ने कहा कि मोहन भागवत हिंदू समाज के लिए एक अभिभावक, मार्गदर्शक और दार्शनिक की भूमिका निभाते हैं। उनके अनुसार जब भी समाज किसी चुनौती का सामना करता है या युवाओं के भटकने की आशंका होती है, तब वे समाज की बात सुनते हैं और सकारात्मक दिशा देने का प्रयास करते हैं।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं के सामने अनेक प्रकार की चुनौतियां और भ्रम की स्थितियां हैं। ऐसे में कई बार वे अनजाने में ऐसे रास्तों पर चले जाते हैं, जो देशहित के अनुकूल नहीं होते। इसलिए समाज के वरिष्ठ नेतृत्व का दायित्व है कि वह युवाओं को सही दिशा दिखाए और उन्हें रचनात्मक सोच की ओर प्रेरित करे। दिलीप घोष ने विश्वास जताया कि आरएसएस प्रमुख द्वारा उठाया गया यह मुद्दा समाज के लिए सकारात्मक परिणाम लेकर आएगा।

--आईएएनएस

एसएके/वीसी