झारखंड में जनगणना-2027 के महाअभियान की हुई शुरुआत, राज्यपाल ने पोर्टल पर दर्ज की अपनी जानकारी
रांची, 1 मई (आईएएनएस)। झारखंड में जनगणना-2027 के महाअभियान की शुरुआत हो गई है। शुक्रवार को राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने राजधानी के लोक भवन में राज्य की 'स्व-गणना प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत की। इस मौके पर उन्होंने स्वयं अपनी व्यक्तिगत और आवासीय जानकारी पोर्टल पर दर्ज कर इस राष्ट्रीय महत्व के कार्य में अपनी सहभागिता सुनिश्चित की।
इस अवसर पर उपस्थित अधिकारियों और मीडिया को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने आंकड़ों की ताकत पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी राज्य या राष्ट्र की तरक्की केवल हवा-हवाई दावों से नहीं, बल्कि ठोस और सटीक आंकड़ों के आधार पर तय होती है।
राज्यपाल के अनुसार, जनगणना केवल व्यक्तियों की गिनती नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा व्यापक डेटाबेस है जो हमें परिवारों की संरचना, लोगों के रहन-सहन के स्तर, उनकी आर्थिक स्थिति और समाज के वास्तविक स्वरूप का आईना दिखाता है। इन्हीं आंकड़ों को बुनियाद बनाकर सरकारें आने वाले वर्षों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे जैसी महत्वपूर्ण नीतियों और योजनाओं का खाका तैयार करती हैं।
अभियान की तकनीकी बारीकियां साझा करते हुए अधिकारियों ने बताया कि जनगणना-2027 के इस पहले चरण में मुख्य रूप से 'मकान सूचीकरण' और 'मकानों की गणना' का कार्य किया जाएगा। पहले चरण में लोग खुद से मोबाइल ओटीपी के आधार पर ऑनलाइन विवरण दर्ज कर सकेंगे। यह प्रक्रिया झारखंड में 1 मई से 15 मई तक चलेगी। इसके बाद जनगणना प्रगणक घर-घर पहुंचकर आंकड़ों की पुष्टि करेंगे।
राज्यपाल ने राज्य की जनता से अपील करते हुए कहा कि जनगणना एक साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने नागरिकों का आह्वान किया कि जब भी जनगणना कर्मी या प्रगणक उनके घर दस्तक दें, तो वे उन्हें डराने या संकोच करने के बजाय सही और पूरी जानकारी उपलब्ध कराएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि आपकी दी हुई एक गलत जानकारी भविष्य की सरकारी योजनाओं के लाभ से आपको या आपके क्षेत्र को वंचित कर सकती है, इसलिए इस राष्ट्रीय यज्ञ में अपनी आहुति सही आंकड़ों के रूप में दें।
कार्यक्रम के दौरान रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री, नगर आयुक्त सुशांत गौरव और झारखंड के मुख्य जनगणना पदाधिकारी प्रभात कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे, जिन्होंने राज्यपाल को इस पूरी डिजिटल प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी। सरकार का लक्ष्य इस बार डिजिटल माध्यमों का अधिक से अधिक उपयोग करना है ताकि आंकड़ों में त्रुटि की गुंजाइश कम से कम हो और रिपोर्ट जल्द से जल्द तैयार की जा सके।
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