☰
×

झारखंड में दुर्गा पूजा पंडालों में पीओपी-थर्मोकोल पर रोक के निर्देश, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की नजर

 

रांची, 28 सितंबर (आईएएनएस)। झारखंड में दुर्गा पूजा की तैयारियों के बीच राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पर्यावरण को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। राजधानी रांची, जमशेदपुर, बोकारो, धनबाद, हजारीबाग, पलामू समेत राज्य के दूसरे शहरों में बड़ी संख्या में बनाए जा रहे पंडालों से लेकर दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन को लेकर बोर्ड ने पूजा समितियों और नगर निकायों की जिम्मेदारियां तय कर दी हैं।

बोर्ड की ओर से सोमवार को जारी किए गए निर्देशों के अनुसार, पूजा समितियों से प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी), थर्मोकोल और रेजिन फाइबर जैसी सामग्री से बनी मूर्तियों से बचने और प्राकृतिक मिट्टी से बनी पर्यावरण अनुकूल प्रतिमाओं का इस्तेमाल करने को कहा गया है। साथ ही प्रतिमा निर्माण और खरीद के लिए संबंधित नगर निकाय से पंजीकृत या अधिकृत कारीगरों को ही प्राथमिकता देने का निर्देश दिया गया है।

दुर्गा पूजा के दौरान पंडालों से निकलने वाले कचरे को लेकर भी विशेष व्यवस्था करने को कहा गया है। प्रत्येक पूजा पंडाल में तीन तरह के कूड़ेदान रखना जरूरी होगा, ताकि जैविक और गैर-जैविक कचरे के साथ अन्य पूजा सामग्री को अलग-अलग एकत्र किया जा सके। पूजा में इस्तेमाल होने वाले फूल, पत्ते, कपड़े और सजावटी सामग्री को मूर्ति विसर्जन से पहले ही अलग करने के निर्देश दिए गए हैं।

बोर्ड ने कहा है कि विसर्जन के बाद नदी, तालाब या झील के किनारे पूजा सामग्री, कपड़े और सजावट का कचरा नहीं छोड़ा जाना चाहिए। स्थानीय निकायों को विसर्जन के 24 घंटे के भीतर विसर्जन स्थलों की सफाई कर वहां बची सामग्री हटाने का निर्देश दिया गया है। विसर्जन स्थल पर ठोस कचरा जलाने पर भी रोक रहेगी। जहां नदी या तालाब में विसर्जन की व्यवस्था होगी, वहां स्थानीय प्रशासन जरूरत के अनुसार अस्थायी कृत्रिम कुंड बना सकता है। इन कुंडों में विसर्जन के बाद पानी की गुणवत्ता की जांच के बाद ही पानी को जलस्रोत में जाने देने की व्यवस्था करने को कहा गया है।

पूजा समितियों को विसर्जन के लिए संबंधित नगर निकाय से पहले अनुमति लेने और प्रबंधन योजना उपलब्ध कराने को कहा गया है। वहीं नगर निकायों और जिला प्रशासन को पर्यावरण अनुकूल प्रतिमा बनाने वाले कारीगरों को ही लाइसेंस या अनुमति देने तथा जलस्रोतों की उपलब्धता के अनुसार प्रतिमाओं की ऊंचाई पर भी नियंत्रण रखने के निर्देश दिए गए हैं।

आम लोगों से भी अपील की गई है कि पूजा सामग्री को पॉलीथिन में बांधकर नदी या तालाब में न डालें। घरों में स्थापित छोटी प्रतिमाओं का विसर्जन घर पर या नगर निकायों द्वारा बनाए गए कृत्रिम तालाब अथवा टैंक में करने की सलाह दी गई है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पूजा समितियों से इन दिशा-निर्देशों को लेकर पंडालों में पोस्टर और पर्चे लगाने तथा श्रद्धालुओं को जागरूक करने को कहा है।

--आईएएनएस

एसएनसी/एसके