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झारखंड में कांग्रेस कोटे के मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खोला मोर्चा, सरकार के फैसलों पर भी उठाए सवाल

 

रांची, 5 मई (आईएएनएस)। झारखंड सरकार में वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता राधाकृष्ण किशोर ने एक बार फिर पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने पार्टी के प्रदेश प्रभारी के राजू को संबोधित करते हुए सोशल मीडिया पर एक खुला पत्र जारी किया है, जिसमें न सिर्फ संगठन की कार्यशैली की तीखी आलोचना की है, बल्कि राज्य सरकार के कई फैसलों पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

किशोर ने अपने पत्र में साफ शब्दों में कहा कि यदि पार्टी राज्य के ज्वलंत मुद्दों पर चुप्पी साधे रखेगी तो संगठन का विस्तार या पदाधिकारियों की संख्या बढ़ाने का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। उन्होंने हाल ही में घोषित 300 से अधिक पदाधिकारियों वाली प्रदेश कांग्रेस कमेटी पर तंज कसते हुए कहा कि इसे 314 से बढ़ाकर 628 भी कर दिया जाए, तब भी जमीन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा, जब तक पार्टी जनता से जुड़े मुद्दों पर मुखर नहीं होती।

उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड कांग्रेस नेतृत्व राज्य के महत्वपूर्ण सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर लगातार मौन है। महिला आरक्षण विधेयक पर राहुल गांधी के राष्ट्रीय स्तर पर उठाए गए सवालों को राज्य स्तर पर प्रभावी तरीके से मुद्दा नहीं बनाए जाने पर भी उन्होंने नाराजगी जताई। उनका कहना है कि केवल कांग्रेस भवन में प्रेस कांफ्रेंस कर देने से महिलाओं तक संदेश नहीं पहुंचता।

किशोर ने राज्य सरकार के फैसलों पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) से मगही और भोजपुरी भाषाओं को हटाने के सरकार के निर्णय को गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि इस पर प्रदेश कांग्रेस की चुप्पी समझ से परे है। उन्होंने अनुसूचित जाति से जुड़े मुद्दों का भी जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में लगभग 50 लाख एससी आबादी होने के बावजूद अनुसूचित जाति आयोग और परामर्शदात्री परिषद को पुनर्जीवित करने की मांग पर सरकार की ओर कोई पहल नहीं हुई।

मंत्री ने कानून-व्यवस्था के मामलों को उठाते हुए हजारीबाग के विष्णुगढ़ में नाबालिग के साथ दुष्कर्म और तीन अल्पसंख्यकों की हत्या की घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने सवाल किया कि इन मामलों में प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व की सक्रियता क्यों नहीं दिखी। किशोर ने संगठन में सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर भी पारदर्शिता की मांग की। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष से सार्वजनिक तौर पर यह स्पष्ट करने को कहा कि नई कमेटी में दलित, पिछड़े, आदिवासी, अल्पसंख्यक और सामान्य वर्ग के नेताओं को कितनी भागीदारी दी गई है।

उन्होंने अपने पत्र में यह भी कहा कि पार्टी हित में उठाए गए सवालों को पार्टी विरोधी नहीं माना जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि नेतृत्व को उनके सवाल अनुचित लगते हैं तो जो भी निर्णय लिया जाएगा, उन्हें स्वीकार होगा।

बता दें कि एक दिन पहले भी राधाकृष्ण किशोर ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के गठन को लेकर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए थे, जिससे पार्टी के भीतर चल रही खींचतान खुलकर सामने आ गई है। उनके लगातार बयानों को झारखंड कांग्रेस में बड़े राजनीतिक विवाद के तौर पर देखा जा रहा है।

--आईएएनएस

एसएनसी/डीकेपी