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झारखंड के रामगढ़ में प्रदूषण पर हाईकोर्ट सख्त, साल में दो बार होगी औद्योगिक इकाइयों की जांच

 

रांची, 14 सितंबर (आईएएनएस)। झारखंड हाईकोर्ट ने रामगढ़ जिले में निजी औद्योगिक इकाइयों से होने वाले कथित वायु और जल प्रदूषण से जुड़े मामले में सख्त रुख अपनाते हुए झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नियमित और औचक निरीक्षण समेत कई निर्देश दिए हैं। चीफ जस्टिस एम. एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने इससे संबंधित जनहित याचिका का निष्पादन करते हुए कहा कि स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 में निहित जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। यह जनहित याचिका राम किशोर ने दायर की थी।

याचिका में रामगढ़ स्थित बिहार फाउंड्री एंड कास्टिंग लिमिटेड और दयाल स्टील लिमिटेड पर चिमनियों से धुआं और धूल छोड़ने तथा दामोदर नदी और आसपास के जल स्रोतों को प्रदूषित करने के आरोप लगाए गए थे। अदालत ने झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के हजारीबाग क्षेत्रीय अधिकारी को दोनों औद्योगिक इकाइयों का साल में कम से कम दो बार निरीक्षण करने का निर्देश दिया है। इनमें कम से कम एक निरीक्षण बिना पूर्व सूचना के करना होगा ताकि प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके।

अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि यदि किसी उद्योग का कंटीन्यूअस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम लगातार 48 घंटे से अधिक समय तक निर्धारित सीमा से अधिक उत्सर्जन दर्ज करता है, तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सात दिनों के भीतर संबंधित उद्योग को कारण बताओ नोटिस जारी करे। जल प्रदूषण की स्थिति की दोबारा जांच के लिए भी समयसीमा तय की गई है। विवा इंटरनेशनल स्कूल के पास तथा दामोदर नदी के अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों से तीन महीने के भीतर पानी के नमूने लेकर मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में जांच कराने और रिपोर्ट रामगढ़ उपायुक्त को सौंपने का निर्देश दिया गया है।

खंडपीठ ने दोनों कंपनियों के पर्यावरणीय अनुमोदन, कंसेंट टू एस्टेब्लिश (सीटीई) और कंसेंट टू ऑपरेट (सीटीओ) की भी विस्तृत समीक्षा का निर्देश दिया है। संबंधित दस्तावेजों की अगले दो महीने में जांच कर समेकित रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। किसी अनुमति के समाप्त पाए जाने पर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

अदालत ने निर्देशों के अनुपालन की निगरानी के लिए संबंधित अधिकारियों को चार महीने के भीतर अनुपालन हलफनामा दाखिल करने को कहा है। साथ ही याचिकाकर्ता को भविष्य में आदेशों का उल्लंघन या प्रदूषण बढ़ने की स्थिति में इसी मामले में इंटरमीडिएट एप्लिकेशन (दाखिल करने की स्वतंत्रता दी है।

--आईएएनएस

एसएनसी/पीएम