झारखंड डीजीपी नियुक्ति विवाद से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली, 7 सितंबर को अगली तारीख
रांची, 2 सितंबर (आईएएनएस)। झारखंड में डीजीपी की नियुक्ति को लेकर चल रहे मामले में सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पायी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहनन की पीठ में सुनवाई शुरू होते ही झारखंड सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि उन्हें मामले में न्यायालय की ओर से नियुक्त एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट नहीं मिली है। ऐसे में वह रिपोर्ट देखे बिना सरकार की ओर से अपनी बात रखने की स्थिति में नहीं हैं।
कपिल सिब्बल ने न्यायालय से एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट सरकार को उपलब्ध कराने का निर्देश देने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट मिलने के बाद ही सरकार इस मामले में अपना पक्ष रख सकेगी। न्यायालय ने सरकार का अनुरोध स्वीकार करते हुए एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। अदालत ने सुनवाई की अगली तारीख 7 सितंबर तय की है। 18 अगस्त को हुई पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने डीजीपी की नियुक्ति से जुड़े जरूरी दस्तावेज एमिकस क्यूरी को सौंपे थे।
न्यायालय ने उन्हें झारखंड में डीजीपी की नियुक्ति के मामले में अपनी रिपोर्ट देने को कहा था। एमिकस क्यूरी ने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी है। हालांकि, रिपोर्ट में क्या कहा गया है, इसकी जानकारी झारखंड सरकार को नहीं है। इसी वजह से सरकार की ओर से बुधवार को रिपोर्ट उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले राज्य सरकार को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था। सरकार से पूछा गया था कि डीजीपी की नियुक्ति के लिए अधिकारियों के नाम संघ लोक सेवा आयोग को क्यों नहीं भेजे गए। झारखंड में डीजीपी की नियुक्ति का मामला लंबे समय से विवादों में है। यह मामला प्रकाश सिंह बनाम केंद्र सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों से जुड़ा है। राज्य सरकार ने डीजीपी की नियुक्ति के लिए वर्ष 2024 में अलग नियमावली बनाई है।
याचिकाकर्ता पक्ष का आरोप है कि यह नियमावली सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों से अलग है। राज्य सरकार ने डीजीपी नियुक्ति नियमावली बनाने के लिए झारखंड अधिनियम, 1897 की धारा 21 और पुलिस अधिनियम, 1861 की धारा 2 का आधार लिया है। सरकार ने इसी आधार पर 'डीजीपी का चयन एवं नियुक्ति नियमावली, 2024' बनाई।
इस नियमावली के तहत अनुराग गुप्ता की डीजीपी पद पर नियुक्ति हुई थी। उनके पद से हटने के बाद तदाशा मिश्रा को भी इसी नियमावली के तहत डीजीपी नियुक्त किया गया। अनुराग गुप्ता की नियुक्ति के बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। भाजपा नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस मामले में दो याचिकाएं दायर की थीं। इनमें एक याचिका झारखंड हाईकोर्ट और दूसरी सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थी। हाईकोर्ट में दायर याचिका में राज्य सरकार की ओर से बनाई गई डीजीपी नियुक्ति नियमावली की वैधता को चुनौती दी गई थी।
वहीं, सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में डीजीपी के चयन के लिए गठित समिति के सदस्यों के खिलाफ न्यायालय की अवमानना की कार्रवाई की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने बाबूलाल मरांडी की अवमानना से जुड़ी याचिका खारिज कर दी थी। साथ ही डीजीपी नियुक्ति नियमावली की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका को हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करने का आदेश दिया था। इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया।
--आईएएनएस
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