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जेम ग्रेनाइट्स मामले में डीएमके के मानहानि मुकदमे को चुनौती, निर्मल कुमार और आधव अर्जुन हाईकोर्ट पहुंचे

 

चेन्नई, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। चेन्नई स्थित 'जेम ग्रेनाइट्स' के मालिक वीरमणि पर नाबालिग लड़कियों के यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े मामले में नया मोड़ आ गया है। मद्रास हाईकोर्ट में तमिलनाडु के मंत्री सी.टी.आर. निर्मल कुमार और आधव अर्जुन ने उस आदेश के खिलाफ अपील दायर की है, जिसमें डीएमके को 1 करोड़ रुपए के मानहानि के मुकदमे की इजाजत दी गई थी।

जेम ग्रेनाइट्स के मालिक वीरमणि पर नाबालिग लड़कियों के यौन उत्पीड़न का गंभीर आरोप है। इस मामले को लेकर तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) से जुड़े मंत्री सी.टी.आर. निर्मल कुमार और आधव अर्जुन ने कई इंटरव्यू दिए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि पिछली डीएमके सरकार इस मामले में उचित कार्रवाई करने में नाकाम रही और वीरमणि को कार्रवाई से बचने दिया। इसी तरह टीवीके आईटी विंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर डीएमके सरकार पर निशाना साधा था।

इन बयानों को लेकर डीएमके महासचिव और पूर्व मंत्री दुरईमुरुगन ने मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने दावा किया था कि ये बयान मानहानि करने वाले हैं और इनसे डीएमके की छवि खराब हुई है। दुरईमुरुगन ने कोर्ट से मांग की थी कि मंत्री निर्मल कुमार, आधव अर्जुन और टीवीके आईटी विंग को जेम वीरमणि मामले में डीएमके सरकार पर आरोप लगाने वाले बयान देने से रोका जाए।

साथ ही याचिका में उन्होंने मानहानि के लिए 1.01 करोड़ रुपए का हर्जाना देने की भी मांग की थी। इसके लिए दुरईमुरुगन की ओर से मुकदमा करने की इजाजत के लिए अलग से याचिका दायर की गई थी, जिसमें कहा गया था कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के हेड ऑफिस अमेरिका में हैं, जबकि टीवीके का हेडक्वार्टर चेंगलपट्टू जिले में है।

इस पर सुनवाई करते हुए जस्टिस के. गोविंदराजन थिलाकवती ने डीएमके को मंत्री निर्मल कुमार, आधव अर्जुन और टीवीके आईटी विंग के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने की इजाजत दे दी थी। इसी आदेश को चुनौती देते हुए अब मंत्री निर्मल कुमार और आधव अर्जुन ने अपील दायर की है।

उनके वकीलों ने जस्टिस एन. सतीश कुमार और जी.के. मुथुकुमार की डिवीजन बेंच के सामने इस अपील पर तुरंत सुनवाई की मांग की। जजों ने टिप्पणी की कि अगर मंत्रियों के खिलाफ कोई मुकदमा शुरू किया जाना है, तो उन्हें पहले नोटिस दिया जाना चाहिए था। चूंकि बिना नोटिस दिए ही याचिका दायर की गई थी, इसलिए जजों ने कहा कि यह याचिका सुनवाई के लायक नहीं है और रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि वे इस मामले को नंबर न दें।

उस समय दुरईमुरुगन की ओर से पेश वकील ने भरोसा दिलाया कि वे याचिका को नंबर देने पर जोर नहीं देंगे। इस भरोसे को रिकॉर्ड पर लेते हुए जजों ने निर्देश दिया कि अपील को 13 अक्टूबर को सुनवाई के लिए लिस्ट किया जाए।

--आईएए/वीसी