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जेडीयू ने नीतीश कुमार को बिहार विधानसभा दल के नए नेता के चयन का दिया अधिकार

 

पटना, 20 अप्रैल (आईएएनएस)। बिहार में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया, जब जदयू ने नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद अपनी पहली बड़ी विधायक दल की बैठक आयोजित की।

यह बैठक पटना के 1 अणे मार्ग पर लगभग एक घंटे तक चली और इसमें तुरंत किसी नए विधायक दल के नेता का चयन नहीं किया गया।

इसके बजाय सर्वसम्मति से पार्टी ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार को विधायक दल के नए नेता के चयन का अधिकार दे दिया।

बैठक के बाद मीडिया को जानकारी देते हुए जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने पुष्टि की कि एक औपचारिक प्रस्ताव पारित किया गया है, जिसके तहत अंतिम निर्णय लेने का अधिकार नीतीश कुमार को सौंपा गया है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी पार्टी सदस्यों ने नीतीश कुमार के शासन, नेतृत्व और बिहार को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए उनके प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की।

नीरज कुमार ने कहा, “राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार को विधायक दल के नेता के चयन का अधिकार दिया गया है। विधायक दल ने सर्वसम्मति से उनके कार्यों और उपलब्धियों के लिए आभार व्यक्त किया।”

बैठक के दौरान नीतीश कुमार ने यह भी संकेत दिया कि संसदीय जिम्मेदारियों को निभाने के साथ-साथ वह राज्य के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर पार्टी नेताओं के साथ सक्रिय रूप से जुड़े रहेंगे।

उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य संगठनात्मक मामलों और सरकारी योजनाओं की प्रगति से सीधे जुड़े रहना है।

पार्टी के भीतर मतभेदों की अटकलों को खारिज करते हुए नीरज कुमार ने स्पष्ट कहा कि किसी भी तरह का कोई विवाद नहीं है। “आखिर हमारी पार्टी का नाम ही ‘यूनाइटेड’ है,” उन्होंने कहा।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बैठक में किसी विशेष नाम पर चर्चा नहीं हुई और नेता चुनने का अधिकार केवल नीतीश कुमार के पास है।

दिलचस्प बात यह है कि तुरंत निर्णय न होने से राजनीतिक अटकलें तेज हो गई हैं। नीतीश कुमार को यह अधिकार देने का प्रस्ताव उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने रखा, जिसे सर्वसम्मति से समर्थन मिला।

बैठक से पहले निशांत कुमार के समर्थन में पोस्टर भी सामने आए, जिनमें उन्हें संभावित भविष्य नेता के रूप में पेश किया गया था।

हालांकि, पार्टी सूत्रों ने स्पष्ट किया कि निशांत कुमार फिलहाल इस पद के लिए पात्र नहीं हैं, क्योंकि वे किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। उनकी उम्मीदवारी तभी संभव होगी जब वे विधायक या विधान परिषद सदस्य चुने जाएं।

--आईएएनसी

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