जौहर यूनिवर्सिटी विवाद पर बोले अखिलेश यादव, सरकार को शिक्षा में भी सांप्रदायिकता नजर आती है
लखनऊ, 16 जुलाई (आईएएनएस)। रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय पर संभावित बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सियासत तेज हो गई है। इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा को शिक्षा में भी सांप्रदायिकता नजर आती है।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा कि शिक्षा, शिक्षक, शिक्षार्थी और शिक्षा के बाद मिलने वाली नौकरी भाजपा के एजेंडे में नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा संस्थानों को भी राजनीतिक और सांप्रदायिक नजरिए से देख रही है।
उन्होंने आगे कहा कि भाजपा अपने "अनरजिस्टर्ड संगी-साथियों" के अवैधानिक भवनों पर कब कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा कि जब उनके सहयोगी संगठन पंजीकृत नहीं हैं तो उनके भवन, कार्यालय और संस्थान कैसे वैध हो सकते हैं। सपा प्रमुख ने प्रस्तावित कार्रवाई को निंदनीय बताया।
दरअसल, विवाद तब शुरू हुआ जब रामपुर जिला प्रशासन ने आजम खान द्वारा स्थापित जौहर विश्वविद्यालय की 40 इमारतों में से 38 को बिना स्वीकृत भवन नक्शा के निर्मित पाए जाने के बाद उन्हें ध्वस्त करने का नोटिस जारी किया। इसके बाद यह मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया।
इस मुद्दे पर एआईएमआईएम ने भाजपा सरकार के साथ-साथ समाजवादी पार्टी पर भी हमला बोला। पार्टी के प्रवक्ता शादाब चौहान ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के निर्माण के समय समाजवादी पार्टी सरकार की ओर से छोड़ी गई खामियों का फायदा उठाकर वर्तमान भाजपा सरकार कार्रवाई कर रही है।
उन्होंने दावा किया कि यह सब सपा प्रमुख अखिलेश यादव की सहमति से हो रहा है। शादाब चौहान ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव ने कभी भी अल्पसंख्यकों और उनके अधिकारों के मुद्दों पर मजबूती से आवाज नहीं उठाई और मुस्लिम समुदाय को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया।
एआईएमआईएम ने जौहर विश्वविद्यालय को भेजे गए विध्वंस नोटिस को अल्पसंख्यक समुदाय के शैक्षणिक संस्थान पर निशाना साधा। पार्टी ने सवाल उठाया कि जिन अधिकारियों की मौजूदगी में इन इमारतों का निर्माण हुआ, उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है।
--आईएएनएस
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