जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों के ध्वस्तीकरण के खिलाफ सपा जंतर-मंतर पर करेगी धरना, राष्ट्रपति से एसआईटी जांच की मांग
नई दिल्ली, 20 सितंबर (आईएएनएस)। समाजवादी पार्टी ने रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों के ध्वस्तीकरण के नोटिस और मोहम्मद आजम खान, अब्दुल्ला आजम खान तथा उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन का आह्वान किया है। पार्टी ने इस संबंध में राष्ट्रपति को पत्र भेजकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।
सपा के राष्ट्रीय सचिव और जौनपुर सदर के पूर्व विधायक मोहम्मद अरशद खान की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से केवल इमारतों का मामला नहीं जुड़ा है, बल्कि इससे विद्यार्थियों की शिक्षा, शिक्षकों के रोजगार और शोध कार्य का भविष्य भी प्रभावित हो सकता है। पार्टी ने ध्वस्तीकरण नोटिस के वैधानिक आधार की स्वतंत्र समीक्षा होने तक कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है।
पत्र में वर्ष 2019 में मोहम्मद आजम खान, अब्दुल्ला आजम खान और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ लगभग 350 मुकदमे दर्ज किए जाने का दावा किया गया है। सपा का आरोप है कि करीब तीन से चार महीने की अवधि में इतनी बड़ी संख्या में मुकदमे दर्ज होना राजनीतिक प्रतिशोध और प्रशासनिक दुरुपयोग की आशंका पैदा करता है।
पार्टी ने राष्ट्रपति से मांग की है कि इन सभी मामलों की एक साथ और समग्र जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के सेवारत या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया जाए। सपा का कहना है कि जांच निष्पक्ष, स्वतंत्र और समयबद्ध होनी चाहिए, ताकि वास्तविक तथ्यों के आधार पर दोष और निर्दोषता निर्धारित हो सके।
पत्र में संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का हवाला देते हुए निष्पक्ष सुनवाई और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े अधिकारों की रक्षा की मांग की गई है। सपा ने आजम खान और अब्दुल्ला आजम खान के लिए निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया तथा कानून के अनुसार जमानत का अधिकार सुनिश्चित किए जाने की मांग भी रखी है।
इसके अलावा पार्टी ने जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों के ध्वस्तीकरण नोटिस को वापस लेने, अंतिम न्यायिक निर्णय तक किसी भी ध्वस्तीकरण कार्रवाई पर रोक लगाने और शिक्षा संस्थानों से जुड़े विवादों का समाधान संवाद तथा कानून के माध्यम से करने की मांग की है।
सपा ने राष्ट्रपति से मामले में हस्तक्षेप कर न्याय सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है। पत्र में कहा गया है कि देश संविधान से चलेगा और विवादों का समाधान संवैधानिक एवं कानूनी प्रक्रिया के तहत होना चाहिए।
--आईएएनएस
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