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Jammu Spy Case: सेना के मेजर की पत्नी पर जासूसी का आरोप, ChatGPT और Claude से संवेदनशील विषयों पर नोट्स बनाने का दावा

 

जम्मू में एक सेना अधिकारी की पत्नी के खिलाफ कथित जासूसी के मामले में केस दर्ज किया गया है। अधिकारियों का आरोप है कि महिला ने ChatGPT और Claude जैसे AI टूल्स की मदद से राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा और भू-राजनीति से जुड़े विषयों पर रिसर्च नोट्स तैयार किए। जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि क्या ये दस्तावेज चीनी खुफिया एजेंसियों से जुड़े लोगों तक पहुंचाए गए थे। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, महिला को गिरफ्तार नहीं किया गया है।

रेलवे स्टेशन पर रोका गया, फोन फोरेंसिक जांच के लिए भेजा

अधिकारियों के मुताबिक, 14 अक्टूबर को खुफिया एजेंसी और पुलिस की संयुक्त टीम ने महिला को जम्मू तवी रेलवे स्टेशन पर रोका था। वह पठानकोट जाने वाली ट्रेन में सवार होने वाली थी। पूछताछ के लिए उसे नजदीकी सैन्य स्टेशन ले जाया गया।

जांच एजेंसियों ने उसका मोबाइल फोन जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेजा है। अधिकारी फोन में मौजूद दस्तावेजों, बातचीत और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की पड़ताल कर रहे हैं। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कौन-सी जानकारी तैयार की गई, क्या उसे किसी के साथ साझा किया गया और इसके पीछे क्या मकसद था।

LoC से लेकर अरुणाचल की परियोजनाओं तक पर रिसर्च का आरोप

अधिकारियों का दावा है कि महिला को सुरक्षा, रक्षा और भू-राजनीति से जुड़े विषयों पर पेपर तैयार करने का काम दिया गया था। इन विषयों में नियंत्रण रेखा (LoC) की स्थिति, अरुणाचल प्रदेश में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाएं और ड्रोन की तैनाती शामिल बताई गई है।

प्रारंभिक जांच में फोन से भारत-इटली रक्षा बैठक, सेना प्रमुख की अमेरिका यात्रा, भारत-रूस रक्षा समझौते और भारत-चीन संबंधों से जुड़े दस्तावेज मिलने की बात कही गई है।

इसके अलावा, अरुणाचल प्रदेश की कलई-II जलविद्युत और कमला परियोजनाओं, कोल्ड स्टार्ट डॉक्ट्रिन, भारत-सेशेल्स संबंध और असम की कुछ परियोजनाओं से संबंधित सामग्री भी मिलने का दावा किया गया है।

हालांकि, इन दस्तावेजों की प्रकृति, उनकी संवेदनशीलता और उनके किसी विदेशी व्यक्ति तक पहुंचने की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

पढ़ाई और अंतरराष्ट्रीय अनुभव की भी जांच

अधिकारियों के अनुसार, महिला तेलंगाना की रहने वाली है और फ्रीलांस रिसर्चर के तौर पर काम करती है। उसने 2021 में बेंगलुरु से इंटरनेशनल रिलेशंस में मास्टर डिग्री और 2022 में जिनेवा से यूरोपियन एंड इंटरनेशनल गवर्नेंस में मास्टर डिग्री हासिल की थी।

उसे 2023 में संयुक्त राष्ट्र (UN) में IT इंटर्नशिप करने वाली भी बताया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, इस दौरान उसकी कई विदेशी नागरिकों से बातचीत हुई थी।

जांच एजेंसियां इन संपर्कों की प्रकृति और उनके उद्देश्य की पड़ताल कर रही हैं। अधिकारियों का दावा है कि महिला की एक चीनी नागरिक से WhatsApp के जरिए बातचीत हुई थी। इसके अलावा, 2024 में सोशल मीडिया के माध्यम से उसकी एक मलेशियाई नागरिक से भी बातचीत हुई, जिसके कथित तौर पर चीनी खुफिया एजेंसियों से जुड़े होने की आशंका जताई गई है।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।

2023 में सेना के मेजर से हुई थी शादी

जानकारी के मुताबिक, महिला ने 2023 में सेना में मेजर रैंक के अधिकारी से शादी की थी। जांच एजेंसियां उसके पेशेवर काम, विदेशी संपर्कों और डिजिटल गतिविधियों के बीच संबंध तलाश रही हैं।

अधिकारियों को आशंका है कि फ्रीलांस रिसर्च के नाम पर संवेदनशील विषयों से जुड़ी जानकारी व्यवस्थित तरीके से जुटाई या साझा की गई हो सकती है। हालांकि, यह अभी जांच का विषय है और आरोपों को साबित करने के लिए ठोस साक्ष्यों की जरूरत होगी।

AI टूल्स की भूमिका भी जांच के दायरे में

इस मामले में ChatGPT और Claude जैसे AI टूल्स का उल्लेख होने के बाद उनकी भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, इन टूल्स की मदद से संवेदनशील विषयों पर नोट्स तैयार किए जाने का आरोप है।

हालांकि, AI टूल का इस्तेमाल करके किसी विषय पर रिसर्च करना अपने आप में जासूसी का प्रमाण नहीं है। जांच में यह स्पष्ट करना जरूरी होगा कि तैयार सामग्री में क्या जानकारी थी, वह कहां से प्राप्त की गई और क्या उसे अनधिकृत रूप से किसी विदेशी संपर्क के साथ साझा किया गया।

डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल जारी

जांच एजेंसियां महिला के मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की विस्तृत फोरेंसिक जांच कर रही हैं। साथ ही, उसके वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल की जा रही है, ताकि किसी संभावित भुगतान या संदिग्ध गतिविधि का पता लगाया जा सके।

फिलहाल, मामले में कई सवालों के जवाब मिलना बाकी है। महिला ने वास्तव में कौन-सी जानकारी साझा की, क्या उसका संबंध किसी विदेशी खुफिया नेटवर्क से था और क्या किसी राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी सूचना का दुरुपयोग हुआ—इन सभी पहलुओं पर जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।