×

जम्मू-कश्मीर में स्थानीय युवाओं की भर्ती के लिए मेहराज मलिक ने पेश किया बिल, कहा- सरकार ने स्वीकार नहीं किया

 

जम्मू, 23 सितंबर (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष और डोडा से विधायक मेहराज मलिक ने विधानसभा में बेरोजगार युवाओं के लिए 'जम्मू-कश्मीर लोकल एरिया बेस्ड रिक्रूटमेंट बिल, 2026' पेश करने का दावा किया है। मलिक ने कहा कि इस बिल में गैर-राजपत्रित पदों पर स्थानीय स्तर पर भर्ती का प्रस्ताव किया गया है और इसमें किसी तरह के अतिरिक्त आरक्षण की मांग नहीं की गई है।

मलिक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बिल और उससे जुड़ा पत्र साझा करते हुए दावा किया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार ने बिल को स्वीकार नहीं किया है।

उन्होंने कहा, ''मैंने जम्मू-कश्मीर के बेरोजगार युवाओं के लिए विधानसभा में 'लोकल एरिया रिक्रूटमेंट बिल' जमा किया, जिसमें बिना किसी अतिरिक्त आरक्षण के क्षेत्र आधारित प्रतिस्पर्धा का प्रस्ताव है। इसमें कोई शॉर्टकट या अतिरिक्त आरक्षण नहीं है, बल्कि स्थानीय युवाओं को मेरिट के आधार पर प्रतिस्पर्धा करने का उचित अवसर देने की बात है। मेरिट को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।''

मलिक की ओर से साझा किए गए प्रस्तावित बिल के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में नॉन-गजटेड यानी गैर-राजपत्रित पदों की भर्ती ब्लॉक, तहसील, सब-डिवीजन और जिला स्तर पर किए जाने का प्रावधान प्रस्तावित है। बिल में कहा गया है कि संबंधित पंचायत, वार्ड, नगरपालिका, हेल्थ ब्लॉक, एजुकेशन जोन, सीडी ब्लॉक या तहसील में रहने वाले योग्य स्थानीय युवाओं को भर्ती में अवसर मिलना चाहिए।

प्रस्ताव के मुताबिक, जिन गैर-राजपत्रित पदों को स्थानीय स्तर पर भरा जा सकता है, उनके लिए स्थानीय उम्मीदवारों को आम तौर पर पूरे केंद्र शासित प्रदेश या राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की जरूरत नहीं होनी चाहिए।

मलिक ने इसके पीछे तर्क दिया है कि अलग-अलग क्षेत्रों के अभ्यर्थियों को शिक्षा, कोचिंग और रोजगार के समान अवसर नहीं मिलते। ऐसे में स्थानीय स्तर पर भर्ती से युवाओं को अपने क्षेत्र में सेवा करने और अपनी शिक्षा एवं कौशल का इस्तेमाल करने का मौका मिल सकेगा।

बिल में भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी, स्वतंत्र और मेरिट आधारित बनाने के लिए एक स्वतंत्र भर्ती एजेंसी की व्यवस्था का भी प्रस्ताव है। साझा किए गए मसौदे के एक हिस्से में भर्ती जेकेएसएसबी के बजाय नई स्वतंत्र एजेंसी से कराने की बात कही गई है।

बिल में नियुक्त कर्मचारियों के लिए रोटेशनल पोस्टिंग और ट्रांसफर पॉलिसी का भी प्रस्ताव है। इसके मुताबिक, कर्मचारी सामान्य तौर पर एक जगह कम से कम तीन साल तक तैनात रहेगा और इसके बाद निर्धारित क्षेत्र या कैडर के भीतर दूसरी जगह स्थानांतरित किया जा सकेगा।

मसौदे में जम्मू-कश्मीर में बेरोजगारी का मुद्दा उठाते हुए कहा गया है कि बड़ी संख्या में शिक्षित, कुशल और प्रशिक्षित युवाओं को योग्यता होने के बावजूद उपयुक्त रोजगार नहीं मिल पा रहा है।

इसमें 2018 में सेवा से हटाए गए प्लस-2 लेक्चरर्स का मुद्दा भी उठाया गया है। प्रस्ताव में सरकार से ऐसे लोगों के लिए उचित और मानवीय नीति अपनाने की मांग की गई है।

इसके अलावा लंबरदारों और चौकीदारों की स्थिति का भी जिक्र करते हुए उनके लिए उचित नीति बनाने की मांग की गई है।

--आईएएनएस

एएमटी/एबीएम