'जम्मू-कश्मीर में मेडिकल इंटर्न्स को मिलते हैं कम पैसे', इल्तिजा मुफ्ती ने उमर अब्दुल्ला सरकार को घेरा
मुंबई, 1 सितंबर (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के मेडिकल इंटर्न्स का स्टाइपेंड विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। पीडीपी की नेता इल्तिजा मुफ्ती ने एमबीबीएस इंटर्न्स का स्टाइपेंड बढ़ाने में देरी को लेकर उमर अब्दुल्ला सरकार की आलोचना की। पीडीपी नेता ने प्रस्तावित 30,000 रुपए महीने के स्टाइपेंड को तुरंत मंजूरी देने की मांग की।
पीडीपी नेता इल्तिजा मुफ्ती ने कहा, "पूरे भारत में से यह सिर्फ जम्मू-कश्मीर के मेडिकल इंटर्न्स हैं, जिन्हें पीनट्स (बहुत कम पैसे) दिए जाते हैं। आपको पता है ये लोग कितनी मेहनत करते हैं? वो दिन-रात मिलाकर 36 घंटे काम करते हैं। इनको गजेटेड हॉलिडे नहीं मिलती, रविवार की छुट्टी नहीं मिलती है, और सप्ताह के अंत में छुट्टी नहीं होती है।"
उन्होंने कहा कि इंटर्न्स को महज 12,400 रुपए महीना स्टाइपेंड मिल रहा है, जो रोजाना करीब 400 रुपए बनता है। सवाल उठ रहा है कि इतनी कम रकम में वे युवा कैसे गुजारा करेंगे, जो अस्पतालों का पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर संभाल रहे हैं और डॉक्टर बनने वाले हैं। पिछले 2 साल से इंटर्न्स लगातार स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर सरकार पर भेदभाव का आरोप लग रहा है।
इल्तिजा मुफ्ती ने आगे कहा कि ओडिशा, बंगाल, यूपी और बिहार जैसे राज्यों ने अपने मेडिकल इंटर्न्स का स्टाइपेंड बढ़ाकर 60,000 रुपए महीना कर दिया है, लेकिन जम्मू-कश्मीर में अब तक कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। इंटर्न्स दो दिन से हड़ताल पर हैं, जिससे अस्पतालों में मरीजों को परेशानी हो रही है। इंटर्न्स का कहना है कि हड़ताल जायज है, क्योंकि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दे रही है।
सरकार पर सवाल उठाते हुए इल्तिजा ने कहा कि बजट बढ़ाने, ऐशो-आराम, मंत्रियों को सुविधाएं देने, बड़े-बड़े मोटरकेड और बाहर इवेंट्स करने के लिए खजाने में पैसे हैं, लेकिन मेडिकल इंटर्न्स का स्टाइपेंड बढ़ाने के लिए खजाना खाली बताया जाता है। जब मंत्रियों और विधायकों की सुविधाओं की बात आती है तो जम्मू-कश्मीर का खजाना भरा हुआ लगता है, लेकिन जैसे ही मेडिकल इंटर्न्स के स्टाइपेंड बढ़ाने की बात आती है, खजाना खाली हो जाता है।
उन्होंने कहा कि हम यहां इंटर्न्स के साथ एकजुटता दिखाने आए हैं और यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उन्हें पूरा समर्थन मिले। जम्मू-कश्मीर का पूरा मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर चाहे मैनपावर हो या सुविधाएं, पूरी तरह से चरमरा चुका है और हेल्थकेयर व्यवस्था बदहाल है।
एक बार फिर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से अपील की गई है कि जल्द बैठक कर मेडिकल इंटर्न्स का स्टाइपेंड बढ़ाया जाए। पीडीपी नेता इल्तिजा मुफ्ती ने कहा कि 12,000 रुपए में ये युवा कैसे गुजारा करेंगे, यह बड़ा सवाल है। इनमें से कई इंटर्न्स की ड्यूटी बड़गाम, कुपवाड़ा जैसे दूर-दराज इलाकों में लगती है। 400 रुपए रोज में ट्रांसपोर्ट का खर्च भी पूरा नहीं होता, रहने और खाने का खर्च तो अलग है। हम यहां इंटर्न्स के साथ एकजुटता दिखाने आए हैं और उन्हें भरोसा दिलाते हैं कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता, हम उनके साथ खड़े रहेंगे।
--आईएएनएस
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