जाम से निजात का ब्लूप्रिंट तैयार: यूपी में सीआरटीसी योजना लागू, 20 जिलों के 172 मार्ग होंगे स्मार्ट मैनेजमेंट के दायरे में
लखनऊ, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्णा ने प्रदेश में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को नियंत्रित करने के लिए नई रणनीति लागू करने का ऐलान किया है। यातायात निदेशालय की ‘सी-आरटीसी’ (सिटी रिड्यूसिंग ट्रैफिक कंजेशन) योजना के तहत पहले चरण में 20 जिलों के 172 व्यस्त मार्गों को चिन्हित कर जाम से राहत दिलाने की व्यापक कार्ययोजना शुरू की गई है।
पुलिस मुख्यालय स्थित सिग्नेचर बिल्डिंग में मंगलवार को आयोजित प्रेस वार्ता में डीजीपी राजीव कृष्णा ने बताया कि प्रदेश के प्रमुख शहरों में पीक आवर्स के दौरान लगने वाले जाम को कम करने के लिए वैज्ञानिक और तकनीक आधारित दृष्टिकोण अपनाया गया है। योजना के तहत उन मार्गों की पहचान की गई है, जहां सबसे अधिक यातायात दबाव रहता है। इन चिन्हित मार्गों में आगरा, अयोध्या, बरेली, गोरखपुर, कानपुर, लखनऊ, मेरठ, वाराणसी और प्रयागराज समेत 20 जिले शामिल हैं।
प्रत्येक मार्ग के लिए अलग से ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लान तैयार किया गया है, जिससे यातायात को सुचारू और नियंत्रित रखा जा सके। योजना की प्रमुख विशेषता “रूट मार्शल” व्यवस्था है। ‘एक रूट-एक जिम्मेदार अधिकारी’ के सिद्धांत पर प्रत्येक मार्ग की निगरानी के लिए अधिकारी तैनात किए जाएंगे, जो जाम की स्थिति पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे। जरूरत के अनुसार एक अधिकारी को एक से अधिक मार्गों की जिम्मेदारी भी सौंपी जा सकती है।
डीजीपी ने बताया कि इस पहल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके माध्यम से ट्रैफिक का रियल टाइम विश्लेषण, औसत और अधिकतम यात्रा समय का आकलन तथा जाम की स्थिति की लाइव मॉनिटरिंग संभव होगी। नोडल अधिकारी मोबाइल के जरिए कभी भी ट्रैफिक की स्थिति देख सकेंगे और त्वरित निर्णय ले सकेंगे। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए '5ई मॉडल'—एजुकेशन, इंफोर्समेंट, इंजीनियरिंग, अतिक्रमण हटाना और ई-रिक्शा प्रबंधन—पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके तहत जागरूकता अभियान, सख्त प्रवर्तन और तकनीकी सुधारों के माध्यम से यातायात व्यवस्था को दुरुस्त किया जाएगा।
राजीव कृष्णा ने कहा कि पहले चरण में पीक आवर्स के दौरान यात्रा समय में करीब 20 प्रतिशत तक कमी लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। योजना की नियमित मॉनिटरिंग के साथ एक माह बाद इसकी समीक्षा कर आवश्यक सुधार भी किए जाएंगे।
--आईएएनएस
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