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गिरफ्तारी की वजह लिखित में बताना जरूरी, वीडियो में जाने ऐसा नहीं करने पर गिरफ्तारी मानी जाएगी गैरकानूनी

 

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को गिरफ्तारी को लेकर अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करते समय पुलिस या जांच एजेंसी के लिए गिरफ्तारी की वजह लिखित रूप में बताना जरूरी है। अगर गिरफ्तारी के समय इसकी जानकारी लिखित में नहीं दी जाती है, तो ऐसी गिरफ्तारी गैरकानूनी मानी जाएगी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि नियमों का उल्लंघन कर की गई गिरफ्तारी के बाद अगर आरोपी को रिहा कर दिया जाता है, तो जांच एजेंसी उसे दोबारा सीधे गिरफ्तार नहीं कर सकती। इसके लिए पहले संबंधित मजिस्ट्रेट से अनुमति लेनी होगी।

दोबारा गिरफ्तारी के लिए मजिस्ट्रेट की मंजूरी जरूरी

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर पहली गिरफ्तारी में तय कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और व्यक्ति को रिहा कर दिया गया, तो जांच एजेंसी के सामने दोबारा गिरफ्तारी की स्थिति में अतिरिक्त प्रक्रिया का पालन करना होगा। कोर्ट के मुताबिक, ऐसी परिस्थिति में पुस सीधे व्यक्ति को रफ्ता नहीं कर सकती। दोबारा गिरफ्तारी से पहले मजिस्ट्रेट की अनुमति लेना जरूरी होगा। यह व्यवस्था गिरफ्तारी की प्रक्रिया में कानूनी सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने से जुड़ी है।

नियम तोड़ने वाले अधिकारी पर होगी विभागीय जांच

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर पहली गिरफ्तारी के दौरान नियमों का पालन नहीं किया गया है, तो संबंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच की जाएगी। कोर्ट ने गिरफ्तारी की प्रक्रिया में अधिकारियों की जवाबदेही को भी महत्वपूर्ण माना।इसके अलावा, अगर उसी मामले में दोबारा गिरफ्तारी की जरूरत पड़ती है, तो आगे की जांच किसी दूसरे अधिकारी को सौंपने की बात कही गई है। इससे जांच की निष्पक्षता बनाए रखने का प्रयास किया जाएगा।

जसरकरनजीत सिंह की अपील पर हुई सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट की ये टिप्पणियां शिरोमणि अकाली दल से जुड़े मुल्लांपुर दाखा विधानसभा क्षेत्र के प्रभारी जसरकरनजीत सिंह की अपील पर सुनवाई के दौरान आईं। मामला नाबालिग से यौन अपराध के आरोपों से जुड़ा है।जसरकरनजीत सिंह की ओर से अदालत में यह मुद्दा उठाया गया था कि गिरफ्तारी के समय उन्हें गिरफ्तारी की वजह लिखित रूप में नहीं बताई गई थी। इसी मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी की प्रक्रिया और दोबारा गिरफ्तारी से संबंधित महत्वपूर्ण निर्देशों पर टिप्पणी की।

गिरफ्तारी की प्रक्रिया में लिखित जानकारी अहम

सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के मुताबिक, गिरफ्तारी के समय संबंधित व्यक्ति को यह जानकारी होना जरूरी है कि उसे किस आधार और किस आरोप में गिरफ्तार किया जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी की कानूनी प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन नहीं होने के गंभीर कानूनी परिणाम हो सकते हैं।इस मामले में कोर्ट की टिप्पणियां गिरफ्तारी की प्रक्रिया, पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही और किसी व्यक्ति के कानूनी अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को रेखांकित करती हैं।