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मनोरंजन से बढ़कर जिम्मेदारी का मुद्दा बन गया

 

सोशल मीडिया आज केवल मनोरंजन का साधन नहीं रहा, बल्कि यह लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स (पूर्व ट्विटर) जैसे प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद रहने और चर्चित होने की होड़ ने समाज की सोच और समझ को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सोशल मीडिया के यह प्लेटफॉर्म्स न केवल मनोरंजन, जानकारी और संवाद का माध्यम हैं, बल्कि अब लोगों के सामाजिक और मानसिक व्यवहार पर भी गहरा असर डालने लगे हैं। कुछ सेकंड की शोहरत और लाखों व्यूज पाने की चाह में कई लोग अपनी जिम्मेदारी, समझदारी और यहां तक कि अपनी जान तक को दांव पर लगाने लगे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि वायरल कंटेंट की होड़ ने कई बार जोखिमपूर्ण और असंवेदनशील व्यवहार को बढ़ावा दिया है। उदाहरण के लिए, खतरनाक स्टंट, ट्रेंडिंग चैलेंज या किसी संवेदनशील स्थान पर रिकॉर्डिंग करना सिर्फ व्यक्तिगत शोहरत के लिए किया जाता है, लेकिन इसके गंभीर परिणाम भी सामने आते हैं। इससे न केवल व्यक्ति की सुरक्षा खतरे में पड़ती है, बल्कि समाज में असंवेदनशीलता और अनुशासनहीनता की प्रवृत्ति भी बढ़ती है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने अपनी नीतियों और कंटेंट मॉडरेशन के माध्यम से इस समस्या को कम करने की कोशिश की है। अलर्ट और चेतावनी संदेश, कंटेंट रिव्यू और जोखिमपूर्ण वीडियो पर प्रतिबंध जैसे उपाय अपनाए जा रहे हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल तकनीकी उपाय हैं; असली समाधान उपयोगकर्ताओं की समझदारी और जिम्मेदार व्यवहार में है।

सामाजिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो सोशल मीडिया केवल व्यक्तिगत शोहरत का साधन नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी भी है। इसे सुरक्षित, जिम्मेदार और संवेदनशील तरीके से उपयोग करना जरूरी है। वायरल होने के लिए जोखिम उठाना या संवेदनशील नियमों को तोड़ना न केवल खुद के लिए खतरा है, बल्कि समाज के लिए भी नकारात्मक संदेश देता है।

कुल मिलाकर, सोशल मीडिया आज मनोरंजन, सूचना और संवाद का एक प्रभावशाली माध्यम है, लेकिन इसके साथ जिम्मेदारी और समझदारी भी जरूरी हो गई है। केवल व्यूज और लाइक्स की होड़ में अपनी सुरक्षा, समझदारी और समाजिक जिम्मेदारी को भूल जाना भविष्य में गंभीर परिणाम ला सकता है। इसलिए हर उपयोगकर्ता को यह समझना चाहिए कि डिजिटल दुनिया में शोहरत पाने के साथ-साथ जिम्मेदार और संवेदनशील बने रहना भी उतना ही जरूरी है।