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इजरायल ने ईरान संघर्ष के दौरान यूएई को आयरन डोम बैटरी भेजी: अमेरिकी राजदूत

 

तेल अवीव, 12 मई (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने माना कि इजरायल ने यूएई को अपनी सुरक्षा पुख्ता करने के लिए आयरन डोम” मिसाइल रक्षा प्रणाली की बैटरियां और कुछ कर्मी भेजे थे।

वॉल्ट्ज ने सोमवार को यह टिप्पणी की थी, जिसे इजरायली अखबार 'इजरायल हयोम' ने प्रमुखता से छापा। वॉल्टेज के हवाले से लिखा कि “हमने देखा कि यूएई ने इजरायल द्वारा उपलब्ध कराए गए आयरन डोम का उपयोग किया।”

वहीं, इस बात की पुष्टि इजरायल में अमेरिकी राजदूत माइक हकबी ने भी एक कार्यक्रम में की।

उन्होंने तेल अवीव सम्मेलन में कहा, “मैं संयुक्त अरब अमीरात की सराहना करना चाहूंगा, जो अब्राहम समझौते का पहला सदस्य है। इसके लाभ देखे। इजरायल ने उन्हें आयरन डोम बैटरियां और उन्हें संचालित करने के लिए कर्मी भेजे।”

इन बयानों से इजरायल और यूएई के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग के संकेत मिलते हैं।

हकबी ने यह भी कहा कि वह “बहुत आशावादी” हैं कि मध्य पूर्व के अलावा विभिन्न देश जल्द ही अब्राहम समझौते में शामिल होंगे। यह 2020 का वह कूटनीतिक समझौता है जिसमें बहरीन और यूएई ने इजरायल को औपचारिक मान्यता दी थी।

ये बयान ऐसे समय में आया है जब संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान पर गुप्त सैन्य हमले किए। यह दावा वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में किया गया, जिसके मुताबिक अप्रैल में ईरान के लावान द्वीप स्थित ऑयल रिफाइनरी को निशाना बनाया गया था, जिससे वहां बड़ी आग लगी और उत्पादन लंबे समय तक प्रभावित रहा।

हमला अप्रैल की शुरुआत में हुआ, उसी समय जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप संघर्ष विराम की घोषणा कर रहे थे। ईरान ने उस समय कहा था, " रिफाइनरी दुश्मन के हमले में क्षतिग्रस्त हुई है।" इसके बाद तेहरान ने यूएई और कुवैत पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे।

यूएई ने इन हमलों को सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं किया। हालांकि यूएई विदेश मंत्रालय ने कहा कि देश को किसी भी शत्रुतापूर्ण कार्रवाई का जवाब देने का अधिकार है, जिसमें सैन्य कार्रवाई भी शामिल है। अमेरिका इस हमले से नाराज नहीं था, क्योंकि उस समय सीजफायर पूरी तरह लागू नहीं हुआ था।

अमेरिका ने चुपचाप यूएई और दूसरे खाड़ी देशों की भागीदारी का स्वागत किया। युद्ध के दौरान ईरान ने यूएई पर 2800 से ज्यादा मिसाइल और ड्रोन दागे। इन हमलों का असर यूएई की एयर ट्रैफिक, पर्यटन और प्रॉपर्टी बाजार पर पड़ा। कई जगह कर्मचारियों की छुट्टियां और छंटनी भी हुई।

इन घटनाओं के बाद यूएई अब ईरान को क्षेत्रीय स्थिरता और अपनी आर्थिक व्यवस्था के लिए खतरा मानने लगा है। यूएई ने युद्ध के दौरान अमेरिका के साथ मजबूत सैन्य सहयोग बनाए रखा।

--आईएएनएस

केआर/