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इजरायल रिन्यूएबल एनर्जी में सहयोग कर भारत की आयतित ईंधन पर निर्भरता कम करने में कर सकता है मदद: डॉ.अमिट मोर

 

नई दिल्ली, 1 जून (आईएएनएस)। इजरायल रिसर्च और डेवलपमेंट के साथ रिन्यूएबल एनर्जी जैसे- सोलर, विंड, जियोथर्मल और हाइड्रोपावर में सहयोग के जरिए, भारत के एनर्जी मिक्स को विविध बनाकर आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद कर सकता है। यह बयान इजरायली इको एनर्जी फाइनेंशियल एंड स्ट्रेटेजिक कंसल्टिंग लिमिटेड के सीईओ डॉ.अमिट मोर ने दिया।

समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए डॉ.मोर ने कहा कि मेरा मानना ​​है कि रिसर्च और डेवलपमेंट में सहयोग, साथ ही सौर, पवन, भूतापीय और जलविद्युत जैसे रिन्यूएबल एनर्जी स्रोतों के विस्तार से भारत के ऊर्जा मिश्रण में विविधता लाई जा सकती है और बिजली उत्पादन के लिए आयातित गैस और परिवहन के लिए आयातित तेल पर इसकी निर्भरता को कम किया जा सकता है। इससे भारत का लचीलापन, ऊर्जा स्वतंत्रता और ऊर्जा सुरक्षा में वृद्धि होगी, जो राष्ट्रीय सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण घटक भी है।

उन्होंने आगे कहा कि इजरायल में विकसित टेक्नोलॉजी और रिसर्च इसमें बड़ा योगदान दे सकती हैं। उदाहरण के लिए, एग्री-वोल्टेइक टेक्नोलॉजी। इनका उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा देना है, खेतों और पौधों को सौर पैनलों से ढककर सौर ऊर्जा का उत्पादन करना है, साथ ही फसलों की पैदावार को बढ़ाना और सौर विकिरण का अधिकतम लाभ उठाना है। यह सबके लिए फायदेमंद स्थिति है।

हाल ही में भारत-इजरायल के बीच खास और अनोखे संबंध पर जोर देते हुए, भारत में इजरायल के राजदूत रियूवेन अजार ने कहा था कि दोनों देशों के बीच साझेदारी छह मुख्य मूल्यों पर आधारित है। इनमें सभ्यतागत लचीलापन, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, लोकतांत्रिक नियम, इनोवेशन, धार्मिक सहनशीलता और सबको साथ लेकर चलने वाला विकास शामिल हैं।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए एक वीडियो मैसेज में, अजार ने कहा, "इजरायल और भारत के बीच का संबंध बहुत खास और अनोखा है। जब मैंने इसके बारे में सोचा, तो मैं इस नतीजे पर पहुंचा कि हमारे इतने शानदार संबंध का कारण यही छह मुख्य मूल्य हैं।"

--आईएएनएस

एबीएस