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'आईएसआई बिल' पर चर्चा के लिए संसदीय स्थायी समिति के पास भेजने की मांग, सांसद राजा राम सिंह ने मंत्री राव इंद्रजीत को लिखा पत्र

 

नई दिल्ली, 3 अगस्त (आईएएनएस)। सीपीआई (एमएल) के लोकसभा सदस्य और फ्लोर लीडर कॉमरेड राजा राम सिंह ने सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) के मंत्री राव इंद्रजीत सिंह को पत्र लिखकर मांग की है कि प्रस्तावित 'इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट' (आईएसआई) बिल को आगे की चर्चा के लिए संसदीय स्थायी समिति के पास भेजा जाए। स्थायी समिति में प्रस्तावित संशोधनों की विस्तृत समीक्षा किए बिना इस बिल को पारित नहीं किया जाना चाहिए।

राजा राम सिंह ने मंत्री इंद्रजीत सिंह को भेजे पत्र में लिखा है, "मैं आईएसआई से जुड़े प्रस्तावित कानूनी बदलावों के बारे में गहरी चिंता व्यक्त करने के लिए यह पत्र लिख रहा हूं। आईएसआई राष्ट्रीय महत्व और वैश्विक ख्याति वाला संस्थान है। ऐसे प्रतिष्ठित संस्थान में किसी भी सुधार के लिए बहुत सावधानी की आवश्यकता होती है। मेरा आपसे अनुरोध है कि महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार करें।"

विशेषज्ञों की सलाह के विपरीत: चौथी समीक्षा समिति (माशेलकर समिति) ने आईएसआई एक्ट 1959 को रद्द करने का सुझाव नहीं दिया था, बल्कि उसने केवल दो संशोधनों के साथ सोसाइटी-आधारित संरचना को बनाए रखने की सिफारिश की थी।

ऐतिहासिक विरासत को नुकसान: आईएसआई सोसाइटी के साथ आईएसआई के सदी पुराने संबंध को तोड़ने से भारतीय पुनर्जागरण की एक ऐतिहासिक विरासत कमजोर होती है और इससे महंगी कानूनी और प्रशासनिक अड़चनें पैदा होने का खतरा है।

परामर्श का अभाव: आईएसआई के तीन मुख्य स्तंभ - सोसाइटी, काउंसिल और एकेडमिक काउंसिल के साथ-साथ अधिकांश फैकल्टी और मुख्य नेतृत्व ने गहरी आपत्ति जताई है और बातचीत का अनुरोध किया है।

शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवधान: ढांचे में आमूल-चूल परिवर्तन करने से आईएसआई वर्षों तक नियमों को फिर से लिखने में उलझा रहेगा, जिससे मुख्य शोध कार्य से ध्यान भटकेगा और एनईपी 2020 के कार्यान्वयन में बाधा आएगी।

गवर्नेंस का बोझ: बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के साथ-साथ कई मैनेजमेंट काउंसिल जोड़ने से एक छोटे संस्थान के लिए अनावश्यक नौकरशाही पैदा होती है।

राजा राम सिंह ने कहा, "मेरी मांग है कि इन दूरगामी परिणामों को देखते हुए आगे कोई विधायी कदम उठाने से पहले इस बिल को विस्तृत समीक्षा और हितधारकों के साथ परामर्श के लिए संसदीय समिति को भेजा जाए।

--आईएएनएस

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