टिकट कैंसिल करने पर 1 रुपया कम लौटाना IRCTC को पड़ा महंगा, वीडियो में जाने उपभोक्ता आयोग ने 3101 रुपए लौटाने और 9% ब्याज देने का दिया आदेश
ट्रेन टिकट कैंसिल करने पर यात्री को एक रुपया कम रिफंड करना IRCTC को महंगा पड़ गया। केरल के कासरगोड जिला उपभोक्ता आयोग ने रेलवे की ऑनलाइन टिकट बुकिंग कंपनी IRCTC को यात्री का बकाया एक रुपया लौटाने के साथ कुल 3100 रुपए हर्जाना और मुकदमे का खर्च देने का आदेश दिया है। आयोग ने बकाया एक रुपये पर 9 प्रतिशत सालाना ब्याज देने को भी कहा है।
आयोग ने इस मामले में IRCTC की सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार को जिम्मेदार माना। आदेश के अनुसार, कंपनी को शिकायतकर्ता को 100 रुपए मुआवजा और मुकदमे के खर्च के रूप में 3000 रुपए देने होंगे। इसके अलावा, टिकट कैंसिलेशन के दौरान कम लौटाए गए एक रुपये का भुगतान भी करना होगा। IRCTC को यह पूरी राशि 30 दिन के भीतर चुकाने का निर्देश दिया गया है।
शिकायतकर्ता ने मांगा था 2 लाख रुपए मुआवजा
इस मामले में शिकायतकर्ता ने उपभोक्ता आयोग में याचिका दायर कर IRCTC से बया एक रुपया लौटाने की मांग की थी। उसने कहा था कि टिकट कैंसिल करने के बाद उसे निर्धारित रिफंड से एक रुपया कम मिला।शिकायतकर्ता ने इस मामले को लेकर कंपनी से भ्रम और भरोसा तोड़ने के लिए एक-एक लाख रुपए मुआवजा मांगा था। इस तरह उसने कुल दो लाख रुपए के मुआवजे की मांग की थी। इसके अलावा, उसने मुकदमे के खर्च के लिए 5000 रुपए और बकाया एक रुपया लौटाने की मांग भी की थी।
आयोग ने सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना
मामले की सुनवाई के बाद कासरगोड जिला उपभोक्ता आयोग ने IRCTC को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए जिम्मेदार ठहराया। हालांकि, शिकायतकर्ता की ओर से मांगे गए दो लाख रुपए के मुआवजे के बजाय आयोग ने 100 रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया।
आयोग ने मुकदमे के खर्च के रूप में 3000 रुपए देने और बकाया एक रुपये पर 9 प्रतिशत ज चुकाने का भी निर्देश दिया। इस तरह कंपनी को एक रुपये के रिफंड के साथ कुल 3100 रुपए अतिरिक्त भुगतान करना होगा।
IRCTC की दलील समय सीमा के बाद दाखिल मानी गई
सुनवाई के दौरान IRCTC ने उपभोक्ता आयोग के सामने अपना पक्ष रखा था। हालांकि, आयोग ने कंपनी की ओर से दाखिल जवाब को निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद पेश किया गया माना और उसे खारिज कर दिया।आयोग के आदेश के मुताबिक, IRCTC को 30 दिन के भीतर भुगतान करना होगा। इस मामले में एक रुपये की मामूली रकम को लेकर शुरू हुआ विवाद अब उपभोक्ता अधिकारों और ऑनलाइन टिकट बुकिंग सेवाओं में जवाबदेही का उदाहरण बन गया है।