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जंग के बीच ईरान की रणनीति, फुटेज में देंखे तेल निर्यात और ‘वॉर टैक्स’ से बढ़ाई आर्थिक ताकत

 

अमेरिका और इजराइल के साथ बढ़ते तनाव और जंग जैसे हालातों के बीच Iran ने इस संकट को एक बड़े अवसर में बदलने की रणनीति अपनाई है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान न केवल अपने तेल निर्यात को बनाए रखने में सफल रहा है, बल्कि उसने अतिरिक्त आर्थिक लाभ के नए रास्ते भी खोज लिए हैं।

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जानकारी के अनुसार, United States ने ईरान के Kharg Island के पास स्थित सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, लेकिन वैश्विक तेल संकट के खतरे को देखते हुए प्रमुख तेल टर्मिनल को सीधे टारगेट नहीं किया। इसी रणनीतिक चूक का फायदा उठाते हुए ईरान ने खार्ग टर्मिनल को पूरी तरह चालू रखा है।

बताया जा रहा है कि ईरान ‘घोस्ट फ्लीट’ यानी बिना पहचान वाले या झंडा बदलकर चलने वाले टैंकरों के जरिए लगातार तेल सप्लाई कर रहा है, जिसमें प्रमुख खरीदार के रूप में China शामिल है। इस गुप्त नेटवर्क के चलते अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद ईरान का निर्यात प्रभावित नहीं हुआ है।

International Energy Agency (IEA) के मुताबिक, ईरान वर्तमान में प्रतिदिन करीब 1.7 से 2 मिलियन बैरल तेल का निर्यात कर रहा है। इसमें से लगभग 90 प्रतिशत तेल अब भी खार्ग टर्मिनल के जरिए भेजा जा रहा है, जो देश के लिए सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा निर्यात केंद्र बना हुआ है।

हालांकि, South Pars Gas Field पर हुए हमलों से गैस उत्पादन और निर्यात कुछ हद तक प्रभावित हुआ है, लेकिन सप्लाई पूरी तरह बंद नहीं हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने अपने ऊर्जा ढांचे को इस तरह तैयार किया है कि वह आंशिक हमलों के बावजूद पूरी तरह ठप न हो।

इसके अलावा, ईरान ने एक और बड़ा आर्थिक कदम उठाते हुए Strait of Hormuz से गुजरने वाले विदेशी जहाजों से ‘वॉर टैक्स’ वसूलना शुरू कर दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, हर जहाज से करीब 16.5 करोड़ रुपए तक की राशि ली जा रही है, जिससे ईरान को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हो रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह रणनीति न केवल ईरान को आर्थिक रूप से मजबूत कर रही है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी इसका असर पड़ सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल गुजरता है।

कुल मिलाकर, मौजूदा संघर्ष के बीच ईरान ने यह दिखाया है कि वह दबाव के बावजूद अपने आर्थिक हितों की रक्षा करने और नए अवसरों का लाभ उठाने में सक्षम है। आने वाले समय में इस रणनीति का वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार पर व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है।