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ईरान में बढ़ा सियासी संकट, विदेश मंत्री अराघची पर महाभियोग की तैयारी, वीडियो में जाने सुप्रीम लीडर ने राष्ट्रपति की भूमिका सीमित की

 

ईरान में सत्ता के अंदरूनी समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। देश के कुछ सांसद अब विदेश मंत्री अब्बास अराघची को पद से हटाने की तैयारी में जुट गए हैं। वहीं, दूसरी ओर सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई द्वारा राष्ट्रपति मसूद पजशकियान की सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े अहम फैसलों में भूमिका सीमित किए जाने की खबरों ने ईरानी राजनीति में हलचल बढ़ा दी है।

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रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरानी संसद के वरिष्ठ सांसद होसैनअली हाजीदेलिगानी ने कहा है कि विदेश मंत्री अराघची के खिलाफ महाभियोग लाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए जरूरी दस्तावेज और सबूत जुटाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सही समय आने पर संसद इस मामले में औपचारिक कदम उठाएगी।सांसदों की नाराजगी का मुख्य कारण विदेश नीति से जुड़े फैसलों को माना जा रहा है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि महाभियोग की प्रक्रिया कब शुरू होगी और संसद में इसे कितना समर्थन मिलेगा। लेकिन इस कदम को ईरान की सत्ता व्यवस्था में बढ़ते मतभेदों के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

विदेश नीति पर राष्ट्रपति की पकड़ कमजोर होने का दावा

इजराइली चैनल 14 की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई ने देश की सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े बड़े मामलों में राष्ट्रपति मसूद पजशकियान की भूमिका सीमित कर दी है।रिपोर्ट में दावा किया गया है कि परमाणु कार्यक्रम और अमेरिका के साथ संभावित बातचीत जैसे संवेदनशील मुद्दों पर अंतिम फैसला इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर अहमद वाहिदी के प्रभाव वाले सुरक्षा तंत्र के हाथों में रहेगा।ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में सुप्रीम लीडर को सबसे शक्तिशाली पद माना जाता है। सुरक्षा, रक्षा और विदेश नीति जैसे क्षेत्रों में अंतिम निर्णय अक्सर सर्वोच्च नेतृत्व और उससे जुड़े संस्थानों के पास रहते हैं। ऐसे में राष्ट्रपति की भूमिका सीमित होने की खबरें सत्ता संतुलन को लेकर सवाल खड़े कर रही हैं।

सैन्य जीत के बजाय आर्थिक दबाव की रणनीति

दूसरी ओर, रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार ईरान अब सीधे सैन्य टकराव में जीत हासिल करने के बजाय आर्थिक और रणनीतिक दबाव बनाने की नीति पर काम कर रहा है।रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान समुद्री व्यापार, तेल आपूर्ति और महत्वपूर्ण शिपिंग रूट्स पर दबाव बढ़ाकर अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की लागत बढ़ाने की कोशिश कर सकता है। इसके जरिए तेहरान अपने विरोधियों पर अप्रत्यक्ष दबाव बनाने की रणनीति अपना रहा है।मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच तेल आपूर्ति और समुद्री मार्गों की सुरक्षा वैश्विक चिंता का विषय बनी हुई है। ईरान पहले भी होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों के रणनीतिक महत्व को लेकर संकेत देता रहा है।

अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ तनाव जारी

ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर तनाव बना हुआ है। हाल के घटनाक्रमों ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रिश्तों को और जटिल बना दिया है।विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के भीतर चल रही राजनीतिक खींचतान का असर उसकी विदेश नीति और वैश्विक रणनीति पर पड़ सकता है। अगर संसद में विदेश मंत्री के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो यह राष्ट्रपति पजशकियान सरकार के लिए भी बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।फिलहाल पूरी दुनिया की नजर ईरान के अगले कदमों पर है कि क्या तेहरान कूटनीतिक रास्ते को प्राथमिकता देगा या फिर क्षेत्रीय दबाव की रणनीति को और तेज करेगा।