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ईरान समझौते पर खाड़ी देशों की चिंताओं के बीच बहरीन पहुंचे मार्को रूबियो

 

मनामा, 25 जून (आईएएनएस)। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो गुरुवार को बहरीन पहुंचे। यह उनकी तीन दिवसीय खाड़ी यात्रा का अंतिम पड़ाव है, जिसका मकसद ट्रंप प्रशासन और ईरान के बीच हुए प्रारंभिक समझौते को लेकर चिंतित खाड़ी देशों को आश्वस्त करना है।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अनुसार, रूबियो बहरीन के अधिकारियों और गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। जीसीसी में बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। यह यात्रा पिछले सप्ताह हुए अमेरिका-ईरान प्रारंभिक समझौते के बाद उनकी पहली क्षेत्रीय कूटनीतिक यात्रा है।

संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत में हुई बैठकों के दौरान रूबियो ने यह भरोसा दिलाने की कोशिश की कि प्रस्तावित समझौता ईरान के पक्ष में अत्यधिक झुका हुआ नहीं है। खाड़ी देशों को चिंता है कि समझौते के तहत ईरान को मिलने वाली संभावित रियायतें उसकी क्षेत्रीय ताकत को बढ़ा सकती हैं।

हालिया अमेरिका-इजरायल और ईरान संघर्ष के दौरान कुछ खाड़ी देशों को भी ईरानी हमलों का सामना करना पड़ा था, इसलिए वे इस समझौते के प्रभावों को लेकर विशेष रूप से सतर्क हैं।

कुवैत में पत्रकारों से बात करते हुए रूबियो ने कहा, “हम ऐसा कुछ नहीं करेंगे जो क्षेत्र में हमारे लंबे समय से चले आ रहे सहयोगियों की सुरक्षा को कमजोर करे।”

खाड़ी देशों और अमेरिका के बीच लंबे समय से सुरक्षा और सैन्य सहयोग रहा है। इन देशों में महत्वपूर्ण अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। इसलिए अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी समझौते का प्रभाव पूरे मध्य पूर्व के शक्ति-संतुलन पर पड़ सकता है।

22 जून को अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर तीन दिवसीय दौरे की जानकारी देते हुए कहा था कि इस दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो 23 से 25 जून तक संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, और बहरीन की यात्रा करेंगे। इस दौरान वे क्षेत्रीय प्राथमिकताओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करेंगे, जिनमें ईरान के साथ हुआ समझौता ज्ञापन (एमओयू), स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के माध्यम से सुरक्षित और निर्बाध समुद्री आवागमन सुनिश्चित करने के प्रयास, तथा क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने का महत्व शामिल है।

बहरीन में विदेश मंत्री रूबियो गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे, जहां क्षेत्र से जुड़े साझा हितों और प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

--आईएएनएस

केआर/